कुरुक्षेत्र। बदलती जीवनशैली, मोटापा और अनियमित खान-पान के कारण जिगर (लिवर) की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। अगर समय पर ध्यान न दिया गया तो साल 2050 तक दुनिया में इस समस्या से प्रभावित लोगों की संख्या करीब 180 करोड़ तक पहुंच सकती है। यह जानकारी विश्व जिगर दिवस के अवसर पर पूर्व सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने दी। उन्होंने कहा कि गर्दन पर वसा का जमाव और कालापन दिखे तो लिवर की जांच जरूर कराएं।
डॉ. ममगाईं ने प्रसिद्ध ‘द लेंसेट गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी’ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि 2023 में दुनिया भर में लगभग 130 करोड़ लोग मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीयोटिक लिवर डिजीज (MASLD) से पीड़ित थे। यह आंकड़ा 1990 के 50 करोड़ से 143 प्रतिशत ज्यादा है। पहले इसे नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता था। इस बीमारी में लिवर में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा हो जाती है।
MASLD क्या है और क्यों बढ़ रही है समस्या
MASLD मुख्य रूप से मोटापा, डायबिटीज और असंतुलित जीवनशैली से जुड़ी है। शराब या धूम्रपान के अलावा सुस्त रहन-सहन और खान-पान की गलत आदतें इसका बड़ा कारण हैं। यह बीमारी अक्सर बिना किसी साफ लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ती रहती है, इसलिए समय पर पता चलना मुश्किल होता है।
डॉ. ममगाईं ने बताया कि उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व क्षेत्र इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इन इलाकों में MASLD की दर अन्य जगहों की तुलना में ज्यादा है, जिससे आगे चलकर लिवर सिरोसिस और कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ने की आशंका है।
भारत समेत कई देशों में कामकाजी उम्र के लोगों में यह समस्या बढ़ रही है। पुरुषों में 35 से 39 साल की उम्र और महिलाओं में 55 से 59 साल की उम्र में इसके मामले ज्यादा देखे जा रहे हैं। हालांकि, 80 से 84 साल के बुजुर्गों में जोखिम सबसे अधिक है। कुल मिलाकर, महिलाओं की तुलना में पुरुष ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
लिवर की बीमारी के लक्षण और जोखिम
लिवर की बीमारी कई बार चुपके से बढ़ती है। अगर गर्दन पर वसा जमा हो या कालापन दिखे, साथ ही शुगर और मोटापा की समस्या हो तो लिवर की जांच अवश्य करानी चाहिए। डॉक्टर ने साफ कहा कि बचाव ही सबसे अच्छा इलाज है।
बचाव के आसान उपाय
डॉ. ममगाईं ने स्वस्थ आदतों पर जोर देते हुए कई सुझाव दिए:
- खाना अच्छी तरह चबाकर खाएं।
- ओवर ईटिंग से बचें और माइंडफुल ईटिंग अपनाएं।
- खाना खाने के कम से कम 3 घंटे बाद व्यायाम करें।
- उच्च फाइबर युक्त भोजन, फलियां, फल, सब्जियां, नट्स और सीड्स का ज्यादा सेवन करें।
- पेस्ट्री, केक, सफेद ब्रेड, पास्ता, सोडा, एनर्जी ड्रिंक और पैकेट वाले जूस से परहेज करें क्योंकि इनसे पेट में सूजन हो सकती है।
संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण में रखना लिवर की बीमारी के जोखिम को काफी कम कर सकता है।
विश्व जिगर दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम
यह जानकारी कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश जिला नागरिक अस्पताल परिसर में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में दी गई। कार्यक्रम में डॉ. समृद्धि शर्मा, डॉ. सुनिधि शर्मा, आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सिमरन कौर, डॉ. दीक्षांत मलिक, डॉ. नेहा रंगा, नर्सिंग अधिकारी मोनिका जौहर, नेहा सैनी, पूनम सिंह, सुमन शर्मा, सोनिका शर्मा, पूनम वर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता ओनिश यथार्थ, ध्रुव अंकुर, शिवा ध्यानी, वैष्णवी शर्मा, राजीव चोपड़ा, सुनील अत्री, विनोद शर्मा, रामेश्वर, सुशील, धर्मवीर, अरुण शर्मा और मलकीत सहित कई लोग मौजूद रहे।
डॉक्टरों ने जोर दिया कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर लिवर को मजबूत रखा जा सकता है। अगर कोई लक्षण दिखे या जोखिम कारक हों तो तुरंत चिकित्सक से सलाह लें। समय पर जांच और सही आदतें अपनाने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
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