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हीट स्ट्रेस: गर्भवती महिलाओं और शिशु दोनों के लिए खतरा, ऐसे करें बचाव

Heat Stress in Pregnancy: गर्मी के मौसम में गर्भवती महिलाओं को हीट स्ट्रेस (Heat Stress) का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की सेहत के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। शरीर में गर्मी बढ़ने पर थकान, चक्कर और गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

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Heat Stress in Pregnancy: गर्मी के मौसम में गर्भवती महिलाओं को हीट स्ट्रेस (Heat Stress) का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की सेहत के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। शरीर में गर्मी बढ़ने पर थकान, चक्कर और गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। मध्य प्रदेश सरकार के आयुष विभाग ने गर्भवती महिलाओं को गर्मियों में सावधानी बरतने की सलाह दी है। पर्याप्त पानी पीना, हल्के कपड़े पहनना और दोपहर की धूप से बचना महत्वपूर्ण है।

हीट स्ट्रेस क्या है और कैसे होता है

हीट स्ट्रेस (Heat Stress) तब होता है जब शरीर के अंदर गर्मी ज्यादा बढ़ जाती है और वह उसे बाहर निकालने में असमर्थ हो जाता है। यह तेज धूप, गर्म कमरे या ज्यादा मेहनत से हो सकता है। गर्भावस्था में महिलाओं का शरीर पहले से ज्यादा गर्मी महसूस करता है। हार्मोनल बदलाव, बढ़ा हुआ वजन और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ने के कारण यह समस्या और बढ़ जाती है।

हीट स्ट्रेस के लक्षण

शुरुआत में त्वचा पर चकत्ते या हीट रैश, मांसपेशियों में ऐंठन जैसे लक्षण दिख सकते हैं। अगर ध्यान न दिया जाए तो हीट एग्जॉस्टशन हो सकता है। गंभीर स्थिति में हीट स्ट्रोक हो जाता है, जो मस्तिष्क और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। गर्भवती महिलाओं में थकान, चक्कर आना, सिरदर्द और उल्टी आम लक्षण हैं।

गर्भावस्था में हीट स्ट्रेस (Heat Stress) का खतरा

गर्भावस्था के दौरान महिलाएं पहले से ज्यादा गर्मी सहन करती हैं। इससे मां को परेशानी होती है और शिशु पर भी असर पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी का तनाव समय पर नियंत्रित न किया जाए तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसलिए गर्भवती महिलाओं को खास सावधानी जरूरी है।

बचाव के उपाय: पानी और हाइड्रेशन

दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है। साथ में छाछ, नींबू पानी और ओआरएस का इस्तेमाल करें। इससे डिहाइड्रेशन नहीं होता। गर्भवती महिलाओं को बार-बार छोटे-छोटे घूंट में पानी पीना चाहिए, खासकर पसीना ज्यादा आने पर।

सही कपड़े और समय का ध्यान

हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनें जो पसीना सोख सकें। गहरे रंगों से बचें। दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक तेज धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए। अगर बाहर जाना जरूरी हो तो छाता या दुपट्टा इस्तेमाल करें।

घर में आराम और ठंडक का इंतजाम

घर के अंदर पंखा या कूलर चलाएं। ठंडी और हवादार जगह पर रहें। दिन में कई बार आराम करें। ज्यादा मेहनत वाले काम टाल दें। नियमित ब्रेक लेकर शरीर को ठंडा रखें।

कब डॉक्टर से संपर्क करें

अगर तेज सिरदर्द, चक्कर, उल्टी या बहुत ज्यादा थकान महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से बात करें। ठंडी जगह पर आराम करें और पानी पिएं। समय पर इलाज से बड़े खतरे से बचा जा सकता है।

गर्भावस्था में छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर गर्मी का तनाव और हीट स्ट्रेस से बचाव किया जा सकता है। मध्य प्रदेश आयुष विभाग की इन सलाहों को अपनाकर मां और शिशु दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है। गर्मी के मौसम में स्वस्थ रहने के लिए संतुलित आहार और डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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