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गाजियाबाद-सीतापुर रेलवे पर तीसरी और चौथी लाइन को मंजूरी, 14926 करोड़ रुपये की लागत, 6 नए स्टेशन बनेंगे

केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद-सीतापुर रेल खंड पर तीसरी और चौथी लाइन बनाने की मंजूरी दे दी है। यह 403 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट दिल्ली-गुवाहाटी हाई डेंसिटी नेटवर्क (HDN-4) का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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Railway News: केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद-सीतापुर रेल खंड पर तीसरी और चौथी लाइन बनाने की मंजूरी दे दी है। यह 403 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट दिल्ली-गुवाहाटी हाई डेंसिटी नेटवर्क (HDN-4) का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मौजूदा दोहरी लाइन पर क्षमता उपयोग 168 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो बिना इस प्रोजेक्ट के 207 प्रतिशत हो सकता है। अनुमानित लागत 14,926 करोड़ रुपये है और इसे चार साल में पूरा करने का लक्ष्य है। इससे उत्तर और पूर्वी भारत के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी, माल ढुलाई बढ़ेगी और यात्री सेवाएं सुधरेंगी।

प्रोजेक्ट की मुख्य जानकारी

यह रेल प्रोजेक्ट गाजियाबाद, हापुड़, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर जिलों से गुजरेगा। हापुड़, सिम्भौली, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर और सीतापुर जैसे व्यस्त स्टेशनों को बायपास करने की योजना है, जिससे ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी। इसके लिए छह नए स्टेशन बनाए जाएंगे।

औद्योगिक और पर्यटन लाभ

रूट प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से होकर गुजरता है। गाजियाबाद में मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स, मुरादाबाद में पीतल की वस्तुएं और हस्तशिल्प, बरेली में फर्नीचर, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग, शाहजहांपुर में कालीन और सीमेंट संबंधित उद्योग तथा रोज़ा में थर्मल पावर प्लांट हैं। इससे इन क्षेत्रों में माल परिवहन आसान होगा।

पर्यटन की दृष्टि से भी यह खंड महत्वपूर्ण है। मार्ग के पास दुदेश्वरनाथ मंदिर, गढ़मुक्तेश्वर गंगा घाट, अमरोहा की दर्गाह शाह विलायत जामा मस्जिद और सीतापुर का नैमिषारण्य जैसे धार्मिक स्थल हैं।

आर्थिक और पर्यावरणीय फायदे

प्रोजेक्ट से अतिरिक्त 35.72 मिलियन टन प्रति वर्ष माल ढुलाई की उम्मीद है, जिसमें कोयला, अनाज, रासायनिक खाद और तैयार स्टील शामिल हैं। निर्माण के दौरान 274 लाख मानव-दिवस रोजगार पैदा होगा। सड़क परिवहन की तुलना में हर साल 2,877.46 करोड़ रुपये का लॉजिस्टिक्स खर्च बचने का अनुमान है। CO2 उत्सर्जन में 128.77 करोड़ किलोग्राम की बचत होगी, जो 5.15 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।

यह विकास उत्तर प्रदेश की औद्योगिक प्रगति और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। प्रोजेक्ट पूरा होने पर यात्री और माल गाड़ियों की संख्या बढ़ सकेगी तथा दिल्ली-पूर्वोत्तर गलियारे पर दबाव कम होगा।

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