नई दिल्ली। भारतीय सेना में शीर्ष स्तर पर एक बड़ा बदलाव हुआ है। जनरल धीरज सेठ को देश का नया सेना प्रमुख (Army Chief) नियुक्त किया गया है, और उन्होंने आज से अपना कार्यभार भी संभाल लिया है। इस शीर्ष पद की जिम्मेदारी संभालने से पहले वे भारतीय सेना के उप प्रमुख (Vice Chief of Army Staff) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। जनरल धीरज सेठ के पास रेगिस्तानी इलाकों से लेकर जम्मू-कश्मीर के दुर्गम पहाड़ों में आतंकवाद-विरोधी अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने का एक बेहद शानदार और लंबा अनुभव है।
पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी हुए सेवानिवृत्त
जनरल धीरज सेठ की इस नियुक्ति से पहले, निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी आज अपने पद से सेवानिवृत्त (Retire) हो गए। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक लॉन्स में सेना द्वारा उन्हें एक भव्य समारोह में औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ प्रदान किया गया। इससे पहले जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल (राष्ट्रीय समर स्मारक) पहुंचकर देश के वीर शहीदों को पुष्पांजलि भी अर्पित की।
शानदार 4 दशकों का सैन्य करियर (Four Decades of Military Career)
जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खड़कवासला के पूर्व छात्र रहे हैं। उन्होंने दिसंबर 1986 में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित बख्तरबंद कोर (Armoured Corps) में कमीशन प्राप्त किया था। अपने लगभग 40 वर्षों के इस शानदार सैन्य करियर के दौरान उन्होंने सैन्य ऑपरेशन्स, रणनीतिक योजना, क्षमता विकास और संस्थागत क्षेत्रों में व्यापक अनुभव हासिल किया है, जिसने भारतीय सेना की युद्धक क्षमता को मजबूत करने में बड़ा योगदान दिया है।
महत्वपूर्ण कमांड और रणनीतिक जिम्मेदारियां:
- रेगिस्तानी और पश्चिमी मोर्चा: उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में एक बख्तरबंद रेजिमेंट और पश्चिमी मोर्चे पर एक बख्तरबंद ब्रिगेड की कमान संभाली।
- जम्मू-कश्मीर: घाटी में आतंकवाद-विरोधी बल के रूप में विभिन्न स्तरों पर अभियानों का नेतृत्व किया।
- सुदर्शन चक्र कोर: लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर रहते हुए उन्होंने सेना की एक प्रमुख स्ट्राइक फॉर्मेशन ‘सुदर्शन चक्र कोर’ की कमान संभाली।
- दिल्ली क्षेत्र के जीओसी: उन्होंने दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में भी कार्य किया, जहाँ उन्होंने कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सैन्य कार्यक्रमों और औपचारिक दायित्वों को देखा।
इसके बाद, वे सेना कमांडर के पद पर पदोन्नत हुए और उन्होंने सेना की दक्षिण पश्चिमी कमान तथा दक्षिणी कमान की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। ढाई वर्षों से अधिक समय तक महत्वपूर्ण मोर्चों पर रणनीतिक पर्यवेक्षण करने का उन्हें दुर्लभ गौरव प्राप्त है। उन्होंने सेना मुख्यालय के रणनीतिक योजना और क्षमता विकास विभागों में भी अहम भूमिका निभाई है, जिससे भारतीय सेना के आधुनिकीकरण (Modernization) की दिशा को एक नई मजबूती मिली है।
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