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Delhi EV Policy 2026: दिल्ली की नई ईवी नीति से उद्योगों को मिलेगी रफ्तार, मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन जॉब्स में होगा बड़ा इजाफा

Delhi EV Policy 2026: दिल्ली सरकार की नई ईवी नीति 2.0 को पीएचडीसीसीआई (PHDCCI) ने दूरदर्शी बताया है। ₹15000 करोड़ का निवेश, टैक्स में 100% छूट और पेट्रोल वाहनों पर पाबंदी की पूरी डिटेल यहाँ पढ़ें।

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नई दिल्ली। Delhi EV Policy 2026: दिल्ली सरकार द्वारा नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) पॉलिसी 2026 को मंजूरी दिए जाने के फैसले का देश के उद्योग जगत ने पुरजोर स्वागत किया है। उद्योग जगत के प्रमुख दिग्गजों ने मंगलवार को कहा कि यह नीति राजधानी में पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ शहरी परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बेहद दूरदर्शी कदम है।

इससे न केवल निवेश और घरेलू विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) को गति मिलेगी, बल्कि तकनीकी नवाचार (इन्नोवेशन) को भी एक नया रास्ता मिलेगा। व्यापारिक संगठनों का मानना है कि यह नीति भारत के समग्र इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मजबूत आधार देने में गेमचेंजर साबित होगी।

पीएचडीसीसीआई (PHDCCI) का सरकार को पूर्ण सहयोग

देश के प्रतिष्ठित उद्योग संगठन ‘पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ (PHDCCI) ने इस नीति पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार और ऑटोमोबाइल सेक्टर के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है। संगठन का मुख्य लक्ष्य एक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और पर्यावरण के अनुकूल ईवी इकोसिस्टम तैयार करना है, जो देश के आर्थिक विकास, औद्योगिक बदलाव और पर्यावरण संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।

पीएचडीसीसीआई (PHDCCI) के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि यह नीति स्वच्छ परिवहन को दिल्ली के भविष्य के आर्थिक विकास का एक प्रमुख हिस्सा बनाती है। उन्होंने कहा कि इससे निवेशकों के बीच एक सकारात्मक संदेश जाएगा और उनका भरोसा बढ़ेगा। इसके परिणामस्वरूप ईवी तकनीकों में निवेश बढ़ेगा, घरेलू विनिर्माण का विस्तार होगा और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर युवाओं के लिए ग्रीन जॉब्स (रोजगार के अवसर) पैदा होंगे। राष्ट्रीय स्तर पर यह नीति भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के व्यापक लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करती है।

₹15,000 करोड़ का बड़ा निवेश और मुख्य प्रोत्साहन

सरकार ने इस नई नीति की अवधि के दौरान ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर और इकोसिस्टम के विकास के लिए लगभग 15,000 करोड़ रुपए के भारी-भरकम निवेश का प्रस्ताव रखा है। इस नीति का दायरा सिर्फ गाड़ियों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बैटरी निर्माण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर समाधान, फ्लीट मैनेजमेंट, फाइनेंसिंग और बैटरी रीसाइक्लिंग जैसे कई क्षेत्रों में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।

दिल्ली ईवी पॉलिसी 2.0 की प्रमुख विशेषताएं:

  • टैक्स में छूट: ₹30 लाख (एक्स-शोरूम) तक की कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 100 प्रतिशत की पूरी छूट दी जाएगी।
  • वित्तीय सब्सिडी: इलेक्ट्रिक दोपहिया (2-Wheeler) वाहनों की खरीद पर ₹30,000 तक और तीनपहिया (3-Wheeler) वाहनों पर ₹50,000 तक का वित्तीय प्रोत्साहन मिलेगा।
  • स्क्रैपिंग इंसेंटिव: पुराने बीएस-IV (BS-4) या उससे भी अधिक पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को स्क्रैप (कबाड़) करने पर ₹1 लाख तक की छूट का प्रावधान है।
  • पंजीकरण पर पाबंदी: प्रदूषण नियंत्रण के लिए कड़े कदम उठाते हुए नीति में प्रावधान किया गया है कि 31 मार्च 2028 के बाद दिल्ली में नए पेट्रोल से चलने वाले मोटरसाइकिल और स्कूटर का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इसी तरह, 2026 के अंत के बाद नए सीएनजी (CNG) ऑटो-रिक्शा का पंजीकरण भी नहीं होगा।

पीएचडीसीसीआई (PHDCCI) के सीईओ और महासचिव डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि जैसे-जैसे सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे देश में एडवांस बैटरी तकनीक, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, चार्जिंग उपकरण, डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म और स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट जैसी उन्नत तकनीकों की मांग तेजी से बढ़ेगी। इससे न केवल तकनीकी विकास होगा, बल्कि इस पूरे सेक्टर से जुड़े सहायक उद्योगों में भी नए निवेश और बड़े पैमाने पर नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। यह नीति वर्ष 2030 तक प्रभावी रूप से लागू रहेगी।

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