नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों (Secretaries) के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च-स्तरीय (High-Level) मैराथन बैठक की। लगभग 4 घंटे तक चली इस हाई-प्रोफाइल बैठक में देश के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों की दिशा तय करने के लिए गहन विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में मुख्य रूप से दो बड़े एजेंडों पर ध्यान केंद्रित किया गया—पहला, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (कारोबार में सुगमता) और ‘ईज ऑफ लिविंग’ (आम जनता के जीवन यापन को आसान बनाना) के लिए सरकारी नियमों को सरल करना; और दूसरा, देश में ‘आत्मनिर्भरता’ को और अधिक गति देना।
शीर्ष नौकरशाही को मिला ‘विकसित भारत’ का नया मंत्र
इस महत्वपूर्ण बैठक को वर्ष 2026 की दूसरी छमाही के लिए सरकार की मुख्य नीतिगत प्राथमिकताओं और नौकरशाही को एक सीध में लाने के बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। चालू वित्त वर्ष में प्रधानमंत्री की शीर्ष सिविल सेवकों के साथ यह पहली बड़ी और व्यापक बातचीत है। बैठक में कैबिनेट सचिव के अलावा प्रधानमंत्री के दो प्रधान सचिव—पी.के. मिश्रा और शक्तिकांत दास समेत सभी प्रमुख मंत्रालयों के सचिव व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए।
बैठक के दौरान सभी विभागों के सचिवों ने प्रधानमंत्री के विजन को धरातल पर उतारने के लिए अपने-अपने स्तर पर उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने विभिन्न क्षेत्रों (Sectors) की चुनौतियों को रेखांकित किया और गवर्नेंस (प्रशासन) तथा सर्विस डिलीवरी को बेहतर बनाने के लिए अपनी भविष्य की रणनीतियों की रूपरेखा भी प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की।
विभागीय दूरियां खत्म करें और ‘पीएम गतिशक्ति’ का उपयोग बढ़ाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ (समग्र सरकार) के दृष्टिकोण को अपनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के बीच बनी बाधाओं को पूरी तरह तोड़ा जाना चाहिए ताकि जनता के काम न रुकें।
इंटीग्रेटेड प्लानिंग (एकीकृत योजना) और आपसी तालमेल के महत्व को समझाते हुए पीएम मोदी ने विभागों के बीच सही जानकारी के आधार पर त्वरित फैसले लेने के लिए ‘पीएम गतिशक्ति’ (PM Gatishakti) प्लेटफॉर्म के व्यापक और असरदार इस्तेमाल को बढ़ावा देने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नौकरशाही को फाइलों के बजाय इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि सरकारी योजनाओं का जमीन पर आम जनता के जीवन पर क्या ठोस और सकारात्मक असर पड़ रहा है।
’52 सप्ताह में 52 सुधार’ योजना की समीक्षा
यह उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक इसलिए भी बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि केंद्र सरकार ने हाल ही में रेलवे सहित कई बड़े मंत्रालयों में ’52 सप्ताह में 52 सुधार’ जैसी बेहद महत्वाकांक्षी पहलों की शुरुआत की है। इस योजना के तहत सभी मंत्रालयों के लिए काम को लागू करने की समय-सीमा (Timeline) बहुत स्पष्ट रूप से तय की गई है।
चूंकि प्रधानमंत्री मोदी हमेशा से ही तय समय के भीतर सटीक परिणाम (Results) हासिल करने पर जोर देते रहे हैं, इसलिए यह समय-समय पर होने वाली समीक्षा सरकारी कामकाज की रीढ़ बन चुकी है। इस बैठक के माध्यम से सभी मंत्रालयों को अपनी प्रगति का आकलन करने, जमीनी स्तर पर आ रही लागू करने की चुनौतियों को दूर करने और सुधारों की रफ्तार को दोगुना करने के लिए आपसी समन्वय मजबूत करने का एक बेहतरीन मंच मिला है। इन सभी प्रशासनिक सुधारों का अंतिम लक्ष्य जनता को मिलने वाली सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाना, कागजी नियमों का बोझ कम करना और उद्योगों के साथ-साथ आम नागरिकों का जीवन आसान बनाना है।
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