नई दिल्ली। देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस मारपीट के मुद्दे पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और परीक्षाओं में धांधली को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा।
राहुल गांधी ने कहा कि देश के लाखों छात्र कोई अपराध नहीं कर रहे हैं, वे केवल अपने न्यायोचित अधिकारों, निष्पक्ष भविष्य और एक बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर अपने हक की आवाज उठाने वाले शांत और बेकसूर छात्रों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार क्यों किया जा रहा है?
‘छात्रों पर हथियार तानना और उन्हें पीटना पूरी तरह गलत’
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देश भर के युवाओं की पीड़ा को सामने रखा। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर और अन्य स्थानों से ऐसी तस्वीरें और खबरें आ रही हैं कि सुरक्षा बल प्रदर्शनकारी छात्रों पर हथियार तान रहे हैं, उन्हें लाठियों से पीट रहे हैं और उनका अपमान कर रहे हैं।
राहुल गांधी का वक्तव्य:
“देश के हजारों-हजारों छात्र आखिर क्या गलत कर रहे हैं? वे किसी हिंसा में शामिल नहीं हैं। वे केवल शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरकर सरकार से एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं जो पूरी तरह निष्पक्ष हो और सही ढंग से काम करे। लेकिन दुख की बात है कि आज हमारे देश में ऐसी पारदर्शी व्यवस्था अस्तित्व में ही नहीं है।”
’10 साल में 152 पेपर लीक, 7.5 करोड़ परिवार प्रभावित’
पेपर लीक की भयावह स्थिति पर आंकड़े प्रस्तुत करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में देश भर में 152 पेपर लीक की घटनाएं दर्ज की गई हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें से एक भी मामले में दोषियों को सख्त सजा या दोषसिद्धि (Conviction) नहीं हुई है।
राहुल गांधी ने कहा कि इस लगातार हो रही धांधली के कारण देश के लगभग 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इनमें से अधिकांश परिवार गरीब या मध्यम वर्ग से आते हैं, जो अपने बच्चों की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अपनी जिंदगी भर की खून-पसीने की कमाई लगा देते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विशेष लोगों या गिरोहों का समूह देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था को खोखला कर रहा है, जिससे युवाओं के सामने मानसिक तनाव खड़ा हो गया है और कई होनहार छात्र आत्महत्या जैसे खौफनाक कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था सिर्फ भ्रष्ट नहीं, महंगी और लुटेरी भी
राहुल गांधी ने कहा कि आज समस्या केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था आम और मध्यमवर्गीय परिवारों की पहुंच से बहुत दूर हो चुकी है।
- उन्होंने देश के शिक्षा बजट और NEET अभ्यर्थियों द्वारा किए जाने वाले खर्च की तुलना करते हुए एक बड़ा दावा किया:
- देश का कुल शिक्षा बजट: लगभग ₹1.4 लाख करोड़।
- NEET अभ्यर्थियों व परिवारों का वार्षिक खर्च: लगभग ₹1.32 लाख करोड़।
राहुल गांधी ने इसे देश के आम परिवारों से की जा रही खुली वित्तीय लूट करार दिया। उन्होंने कहा कि पहले तो गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों की कोचिंग, फॉर्म और पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च करते हैं और अंत में उन्हें पता चलता है कि पेपर लीक हो गया है। आज युवाओं के सामने रोजगार के तमाम रास्ते बंद हैं और सिर्फ सरकारी नौकरी का एकमात्र विकल्प बचा है, जिस पर भी पेपर लीक का साया है।
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के सामने रखीं ये 3 बड़ी मांगें
कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि वह छात्रों की मांगों के साथ 1000 फीसदी सहमति रखते हैं और इस पूरे प्रकरण पर सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखीं:
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
- दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे निर्दोष छात्रों के साथ मारपीट और बदसलूकी करने वाले सुरक्षाकर्मियों व अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
- प्रधानमंत्री मांगें माफी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में इतनी शालीनता और नैतिकता होनी चाहिए कि वे देश के करोड़ों ठगे गए छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
‘कल मेरे मुंह से खून निकल रहा था, लेकिन मुझे अपनी परवाह नहीं’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब संवाददाताओं ने राहुल गांधी से पुलिस द्वारा उनके साथ किए गए कथित दुर्व्यवहार और उन्हें हिरासत में लेने की कोशिशों के बारे में सवाल पूछा, तो उन्होंने बहुत ही बेबाकी से जवाब दिया।
राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें अपने साथ हुए किसी भी व्यवहार की बिल्कुल भी चिंता नहीं है।
राहुल गांधी का भावुक बयान:
“अगर मेरे साथ इससे पांच गुना ज्यादा बुरा व्यवहार भी किया जाए, तो भी मुझे उसकी रत्ती भर परवाह नहीं है। कल मेरे मुंह से खून निकल रहा था, लेकिन मेरा ध्यान उस पर नहीं है। हमारा और देश का पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ छात्रों के मुद्दे पर रहना चाहिए। कांग्रेस पार्टी पूरी ताकत के साथ देश के युवाओं के साथ खड़ी है।”
इसके साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा दिए गए बयानों को पूरी तरह से अप्रासंगिक करार दिया। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था कभी हमारी सबसे बड़ी ताकत हुआ करती थी, लेकिन मौजूदा सरकार की नाकामी के कारण आज यह व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो रही है।
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