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Saturday, September 18, 2021
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इथेनॉल क्षेत्र के लिए रोडमैप जारी, 21वीं सदी के भारत की प्राथमिकता

-विश्व पर्यावरण दिवस पर बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत ने छलांग लगाई
-जलवायु परिवर्तन से आ रही चुनौतियों के प्रति काम कर रहा भारत
-जल, वायु और भूमि का संतुलन जरूरी, तभी आने वाली पीढिय़ां होंगी सुरक्षित
-पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य 2025 करने का संकल्प

नई दिल्ली /नेशनल ब्यूरो : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यहां विश्व पर्यावरण दिवस केे मौके पर कहा कि इथेनॉल क्षेत्र के विकास के लिए विस्तृत रोडमैप जारी करके भारत ने एक और छलांग लगाई है। इथेनॉल 21वीं सदी के भारत की बड़ी प्राथमिकता बन गई है। इथेनॉल पर फोकस करने का बेहतर प्रभाव पयार्वरण के साथ-साथ किसानों के जीवन पर भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य प्राप्त करने का समय कम करके 2025 करने का संकल्प लिया है। इससे पहले इस लक्ष्य की प्राप्ति का समय 2030 तय किया गया था जिसे 5 वर्ष कम कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि 2014 तक पेट्रोल में औसत रूप में केवल 1.5 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता था जो अब बढ़कर 8.5 प्रतिशत हो गया है। 2013-14 में देश में लगभग 38 करोड़ लीटर इथेनॉल की खरीद हुई थी जो अब बढ़कर 320 करोड़ लीटर हो गई है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल खरीद में आठ गुना वृद्धि से देश के गन्ना उत्पादक किसानों को लाभ हुआ है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विश्व पर्यावरण दिवस समारोह को संबोधित किया। समारोह का आयोजन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा पर्यावरण,वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने रिपोर्ट ऑफ द एक्सपर्ट कमेटी ऑन रोडमैप फॉर इथेनॉल ब्लेंडिंग इन इंडिया 2020-2025 जारी की। साथ ही पुणे में इथेनॉल के उत्पादन और पूरे देश में वितरण के लिए महत्वाकांक्षी ई-100 पायलट परियोजनाका शुभारंभ किया। इस वर्ष के समारोह का विषय ‘बेहतर पर्यावरण के लिए जैव-ईंधन को प्रोत्साहनÓ था। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रकाश जावडेकर,पीयूष गोयल तथा धर्मेन्द्र प्रधान उपस्थित थे। इस दौरान प्रधानमंत्री ने पुणे के एक किसान के साथ बातचीत भी की जिन्होंने जैविक खेती और कृषि में जैव-ईंधन के उपयोग के बारे में अपने अनुभव को साझा किया।
पीएम मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वजह से आ रही चुनौतियों के प्रति भारत ना सिर्फ जागरूक है बल्कि सक्रियता से काम भी कर रहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि अपना देश आज जलवायु न्याय का अगुवा भी बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब पर्यावरण की रक्षा की बात हो तो यह जरूरी नहीं कि विकास कार्यों को अवरूद्ध किया जाए और इस मामले में भारत दुनिया के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने कहा, अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी दोनों एक साथ चल सकती हैं, आगे बढ़ सकती हैं। भारत ने यही रास्ता चुना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जलवायु की रक्षा के लिए पर्यावरण रक्षा के अपने प्रयासों को संगठित करना बहुत जरूरी है। उन्होंने आग्रह किया कि हम अपनी आने वाली पीढिय़ों को एक सुरक्षित वातावरण तभी दे पाएंगे जब देश का प्रत्येक नागरिक जल, वायु और भूमि के संतुलन को बनाए रखने के लिए साझा प्रयास करेगा।

जलवायु परिवर्तन से लडऩे के लिए नरम रवैये की चर्चा

प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन से लडऩे के लिए अपनाए गए सख्त और नरम रवैये की चर्चा की। उन्होंने सख्त रवैये के बारे में कहा कि अक्षय ऊर्जा के लिए हमारी क्षमता में पिछले 6-7 वर्षों में 250 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। भारत आज स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में दुनिया के शीर्ष 5 देशों में हैं। विशेषकर सौर ऊर्जा की क्षमता पिछले 6 वर्षों में लगभग 15 गुना बढ़ी है।

रेलवे नेटवर्क के एक बड़े हिस्से का विद्युतीकरण

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज देश के रेलवे नेटवर्क के एक बड़े हिस्से का विद्युतीकरण कर दिया गया है। देश के हवाई अड्डों को भी तेजी से सौर ऊर्जा से बिजली उपयोग योग्य बनाया गया है। उन्होंने विस्तार से बताया कि 2014 से पहले केवल 7 हवाई अड्डों पर सौर ऊर्जा सुविधा थी, जबकि आज यह संख्या बढ़कर 50 से अधिक हो गई है। 80 से अधिक हवाई अड्डों को एलईडी लाइट के साथ स्थापित किया गया है जिससे ऊर्जा दक्षता में सुधार होगा। प्रधानमंत्री ने केवडिय़ा को एक इलेक्ट्रिक वाहन शहर के रूप में विकसित करने की चालू परियोजना की चर्चा की।

जल चक्र का भी सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन से

पीएम मोदी ने कहा कि जल चक्र का भी सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन से है और जल चक्र में असंतुलन जल सुरक्षा को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि देश में जल जीवन मिशन के माध्यम से जल संसाधनों के निर्माण और संरक्षण से लेकर जल संसाधनों के उपयोग तक समग्र दृष्टि से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर प्रत्येक परिवार को पाइप से कनेक्ट किया जा रहा है तो दूसरी ओर अटल भूजल योजना और कैच द रेन जैसे अभियानों के माध्यम से भूजल स्तर को बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है।

संसाधनों की होगी रिसाइक्लिंग, 11 क्षेत्र चिन्हित

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने ऐसे 11 क्षेत्रों को चिन्हित किया है जो आधुनिक तकनीक के माध्यम से संसाधनों की रिसाइक्लिंग करके उनका बेहतर उपयोग कर सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में कचरा से कंचन अभियान पर काफी काम किया गया है और अब इसे मिशन मोड में बहुत तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे संबंधित कार्य योजना आने वाले महीनों में लागू की जाएगी जिसमें सभी नियामक और विकास संबंधी पहलू होंगे।

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