नई दिल्ली। संत निरंकारी मिशन 24 अप्रैल 2026 को दिल्ली में मानव एकता दिवस मना रहा है। यह दिन बाबा गुरबचन सिंह जी की स्मृति में सेवा और मानव एकता को बढ़ावा देने के लिए रखा गया है। मुख्य कार्यक्रम बुराड़ी के निरंकारी सरोवर के सामने ग्राउंड नंबर 2 में होगा, जहां सुबह रक्तदान शिविर लगेगा और दोपहर में सत्संग होगा।
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और निरंकारी राजपिता रमित जी की उपस्थिति में यह आयोजन होगा। देश-विदेश की शाखाओं में भी भक्त इस दिन को मनाएंगे।
मानव एकता दिवस क्या है और क्यों मनाया जाता है
मानव एकता दिवस संत निरंकारी मिशन का वार्षिक कार्यक्रम है। इसे बाबा गुरबचन सिंह जी और चाचा प्रताप सिंह जी की याद में आयोजित किया जाता है। दोनों ने अपने जीवन में सेवा, त्याग और मानव प्रेम का उदाहरण दिया। इस दिन का उद्देश्य लोगों को एकता, शांति और भाईचारे का संदेश देना है। मिशन के अनुसार, सच्ची आध्यात्मिकता सेवा और सद्भाव में दिखती है।
यह अवसर केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि सामाजिक सेवा से जुड़ा है। हर साल इस दिन रक्तदान शिविर लगाए जाते हैं, जिससे जरूरतमंद लोगों की मदद होती है।
दिल्ली में मुख्य कार्यक्रम की डिटेल्स
दिल्ली के बुराड़ी स्थित निरंकारी सरोवर के सामने ग्राउंड नंबर 2 में पूरा कार्यक्रम होगा।
- रक्तदान शिविर: सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगा।
- सत्संग: दोपहर में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का प्रवचन होगा।
इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी और विभिन्न अस्पतालों के डॉक्टर और स्टाफ इस शिविर में मदद करेंगे। भक्त निःस्वार्थ भाव से रक्तदान करेंगे।
संत निरंकारी मंडल के सचिव श्री जोगिंदर सुखीजा ने बताया कि संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के मार्गदर्शन में यह शिविर आयोजित किया जा रहा है। हजारों लोग रक्तदान करके मानव सेवा में अपना योगदान देंगे।
रक्तदान शिविर का महत्व
संत निरंकारी मिशन पिछले चार दशकों से रक्तदान के क्षेत्र में सक्रिय है। मिशन का अपना ब्लड बैंक मुंबई में चल रहा है। विगत वर्षों में हजारों शिविरों के जरिए अनगिनत लोगों को रक्त मिला है।
इस साल भी देशभर में 200 से ज्यादा जगहों पर रक्तदान ड्राइव चल रही है। रक्तदान न सिर्फ दूसरों की जान बचाता है, बल्कि दाता को भी आत्मिक संतोष मिलता है। मिशन का मानना है कि रक्तदान सेवा का सबसे अच्छा रूप है।
देश-विदेश में अन्य आयोजन
दिल्ली के मुख्य कार्यक्रम के अलावा, संत निरंकारी मिशन की विभिन्न शाखाओं में भी सत्संग और सेवा कार्यक्रम होंगे। भक्त प्रेम और भक्ति के साथ इस दिन को मनाएंगे। इसका उद्देश्य पूरे विश्व में एकता और सद्भाव का संदेश फैलाना है।
बाबा गुरबचन सिंह जी की स्मृति
बाबा गुरबचन सिंह जी का पूरा जीवन सेवा और विनम्रता का उदाहरण था। उन्होंने मानवता को प्रेम और परोपकार का रास्ता दिखाया। इस दिवस पर उनके आदर्शों को याद किया जाता है। मिशन की शिक्षाएं कहती हैं कि सच्ची साधना शब्दों में नहीं, बल्कि निःस्वार्थ सेवा में है।
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की प्रेरणा से यह कार्यक्रम चल रहा है। उनकी शिक्षाएं लोगों को प्रेम, एकता और सह-अस्तित्व का महत्व सिखाती हैं।
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