नई दिल्ली। वर्ल्ड लीडर्स फोरम (World Leaders Forum) में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (CM Vishnu Deo Sai) ने ऐलान किया कि छत्तीसगढ़ अब केवल खनिजों पर निर्भर न रहकर युवाओं को रोजगार निर्माता बना रहा है। राज्य सरकार 2030 तक 5 हजार स्टार्टअप्स और 6 लाख छात्रों को एआई ट्रेनिंग देकर नवाचार और उद्यमिता आधारित अर्थव्यवस्था गढ़ेगी।
वैश्विक मंच पर छत्तीसगढ़ की नई आर्थिक तस्वीर
राजधानी दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वैश्विक उद्योगपतियों और विश्व नेताओं के सामने राज्य की तरक्की का खाका खींचा। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन जैसी हस्तियों की उपस्थिति में उन्होंने बताया कि राज्य कृषि, सेवा और उद्योग के बल पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का आकार 6.31 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है, जिसमें 11.57 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई है। वहीं प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,79,244 रुपये हो गई है। वर्ष 2026-27 के 1.72 लाख करोड़ रुपये के वार्षिक बजट का बड़ा हिस्सा ढांचागत विकास और जनकल्याण पर खर्च किया जा रहा है।
युवाओं को ‘जॉब सीकर’ से ‘जॉब क्रिएटर’ बनाने का विजन
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार का ध्यान युवाओं की सोच बदलने पर है ताकि वे नौकरी ढूंढने की बजाय दूसरों को काम दे सकें।
- सीड फंड सहायता: नए उद्यमियों को अपना कारोबार शुरू करने के लिए 10 लाख रुपये तक की शुरुआती आर्थिक मदद दी जा रही है।
- एआई तकनीक और प्रशिक्षण: 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को आर्टिफिशियली इंटेलिजेंट (AI) बनाया जाएगा, जबकि 50 से अधिक नागरिक सेवाएं एआई पर आधारित होंगी।
- नवा रायपुर का एआई पार्क: लगभग 1,000 करोड़ रुपये से नवा रायपुर में एआई डेटा सेंटर पार्क का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा 500 करोड़ रुपये के राज्य एआई मिशन के तहत 100 एआई डेटा लैब और 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जा रहे हैं।
नई औद्योगिक नीति 2024-30 और भारी निवेश
पारदर्शी शासन प्रणाली और ‘सिंगल विंडो सिस्टम 2.0’ की बदौलत राज्य में बीते दो सालों में 450 से ज्यादा कागजी प्रक्रियाओं को खत्म या आसान किया गया है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026 के लागू होने से 15 लाख एमएसएमई इकाइयों को सीधा लाभ मिलेगा, जिसमें कम जोखिम वाले उद्योगों को समयबद्ध स्वीकृतियां और ‘डीड अप्रूवल’ की सुविधा दी गई है। इन सुधारों के चलते राज्य को विभिन्न क्षेत्रों जैसे सेमीकंडक्टर, एआई, ग्रीन एनर्जी, फार्मा और लॉजिस्टिक्स में 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं।
बस्तर का पुनरुद्धार और बुनियादी ढांचे का विस्तार
सुरक्षा के मोर्चे पर मिली सफलता के बाद बस्तर अब राज्य के नए आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।
- आजीविका और शिक्षा: 10 लाख परिवारों के जीवन स्तर को उठाने के लिए 4,824 करोड़ रुपये की योजना पर काम जारी है। बस्तर में 421 बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है।
- कनेक्टिविटी और पर्यटन: 3,513 करोड़ रुपये की जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना बस्तर के खनिजों और कृषि उत्पादों को सीधे बड़े बाजारों से जोड़ेगी। चित्रकोट, तीरथगढ़ और कांगेर घाटी जैसे पर्यटन स्थलों को उद्योग का दर्जा देकर रोजगार के अवसर पैदा किए जा रहे हैं।
ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर पर फोकस
पारंपरिक ऊर्जा के साथ-साथ छत्तीसगढ़ सौर ऊर्जा क्षेत्र में भी छलांग लगा रहा है। राज्य में 4,000 मेगावाट अतिरिक्त सौर क्षमता विकसित की जा रही है और भिलाई में पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट शुरू हो चुका है।
प्राकृतिक संसाधनों के वैल्यू एडिशन के लिए नवा रायपुर व राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर, फार्मा पार्क और गारमेंट पार्क बनाए जा रहे हैं। कोरबा में मिले लिथियम के भंडारों से भविष्य की बैटरी तकनीक और नई ऊर्जा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
वर्ल्ड लीडर्स फोरम के इस महत्वपूर्ण सत्र में मुख्यमंत्री के साथ उनके मीडिया सलाहकार आर कृष्णा दास, प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल और आवासीय आयुक्त श्रुति सिंह समेत वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
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