पटना। बिहार की राजधानी पटना, जो देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का सबसे बड़ा हब मानी जाती है, इन दिनों एक बेहद सनसनीखेज और रहस्यमयी विवाद की गवाह बनी हुई है। ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी (Gyan Bindu GS Academy) के संचालक रौशन आनंद के छोटे भाई प्रिंस यादव की नेपाल के एक होटल में हुई संदिग्ध मौत ने पूरी कोचिंग इंडस्ट्री में भूचाल ला दिया है। सोमवार को जब प्रिंस यादव का पार्थिव शरीर उनके पैतृक निवास पहुंचा और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई, तो वहां हजारों छात्रों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
माहौल में गम तो था ही, लेकिन उससे कहीं ज्यादा आक्रोश नजर आ रहा था। इसी दौरान, महज कुछ घंटे पहले बेउर जेल से जमानत पर बाहर आए रौशन आनंद ने मीडिया के कैमरों के सामने आकर सीधे तौर पर ‘खान सर’ (Khan Sir) के नाम से मशहूर फैजल खान को ललकारते हुए भाई की मौत के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहरा दिया।
‘मैं सनातनी हिंदू हूं, न्याय लेकर रहूंगा’ — रौशन आनंद का तीखा हमला
जेल की सलाखों से बाहर आते ही रौशन आनंद ने किसी भी तरह की कूटनीतिक या दबी हुई भाषा का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने सीधे तौर पर खान सर पर हमला बोलते हुए कहा, “माननीय और लोकप्रिय कहे जाने वाले फैजल खान असल में सुबह से शाम तक सिर्फ और सिर्फ षड्यंत्र रचते हैं। उन्होंने पढ़ाना कम और साजिशें रचना ज्यादा शुरू कर दिया है।” रौशन आनंद ने पटना पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पटना पुलिस खान सर के प्रभाव में काम कर रही है और इस बेहद संवेदनशील मामले को एक सामान्य मौत या दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की जा रही है।
भावुक और गुस्से से भरे लहजे में रौशन आनंद ने आगे कहा, “मैं एक सनातनी हिंदू हूं। मैं किसी के साथ बेवजह का टकराव या हिंसा नहीं चाहता, लेकिन मैं अपने भाई की मौत के पीछे छिपी सच्चाई को सामने लाकर रहूंगा। मुझे देश की न्याय व्यवस्था और कानून पर पूरा भरोसा है। मैं जांच एजेंसियों का पूरा सहयोग करूंगा, लेकिन अगर किसी ने मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की, तो मैं शांत नहीं बैठूंगा।”
नेपाल के होटल में मौत का रहस्य: आखिर उस रात क्या हुआ था?
इस पूरे विवाद की सबसे संवेदनशील और केंद्रीय कड़ी प्रिंस यादव की मौत है। मिली जानकारी के अनुसार, प्रिंस यादव का शव नेपाल के एक होटल के कमरे में बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद किया गया था। मौत की खबर सुनते ही पटना से लेकर नेपाल तक हड़कंप मच गया। फिलहाल नेपाल पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले की गहराई से तफ्तीश कर रही है। होटल के एंट्री रजिस्टर, रूम बुकिंग रिकॉर्ड, सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, प्रिंस के मोबाइल का कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) और डिजिटल फुटप्रिंट्स की बारीकी से जांच की जा रही है।
नेपाल पुलिस ने अभी तक अधिकारिक रूप से मौत के कारणों की पुष्टि नहीं की है और न ही किसी व्यक्ति को नामजद किया है। बहरहाल, फॉरेंसिक और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है ताकि यह साफ हो सके कि यह आत्महत्या का मामला है, कोई अचानक हुई दुर्घटना है या फिर इसके पीछे कोई गहरी आपराधिक और राजनीतिक साजिश छिपी हुई है।
दो कोचिंग दिग्गजों का विवाद: कैसे शुरू हुआ यह खूनी खेल?
इस विवाद की पृष्ठभूमि को समझने के लिए हमें कुछ दिन पीछे जाना होगा, जब पटना के दो सबसे बड़े कोचिंग संस्थानों के बीच का टकराव खुलकर सड़कों पर आ गया था। पटना के बाजार समिति और कदमकुआं जैसे इलाकों में दोनों पक्षों के समर्थकों और छात्रों के बीच भारी मारपीट, तोड़फोड़ और यहाँ तक कि सरेआम गोलीबारी की घटनाएं भी दर्ज की गई थीं। इस हिंसक झड़प के बाद दोनों ही ओर से एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज कराए गए।
पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया और इसी विवाद के चलते ज्ञान बिंदु अकादमी के संचालक रौशन आनंद को जेल जाना पड़ा था। इसी पुलिसिया तफ्तीश के दौरान रौशन के भाई प्रिंस यादव का नाम भी सामने आया था, जिसके बाद से ही वह काफी तनाव में थे और अचानक उनकी नेपाल में मौत हो गई।
तेजस्वी यादव की एंट्री: मुख्यमंत्री को पत्र लिख की CBI जांच की मांग
जैसे ही यह मामला पटना की सड़कों से निकलकर नेपाल पहुंचा, बिहार की सियासत में भी उबाल आ गया। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को अत्यंत गंभीर बताते हुए इसमें सीधे तौर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक कड़ा पत्र लिखा। तेजस्वी यादव ने अपने पत्र में राज्य की कानून व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता पर बड़े सवाल उठाए।
तेजस्वी यादव ने मांग की है कि चूंकि मामला दो देशों (भारत और नेपाल) से जुड़ा हुआ है और इसमें बिहार के बेहद प्रभावशाली चेहरे शामिल हैं, इसलिए स्थानीय पुलिस की जांच पर जनता का भरोसा डगमगा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि इस पूरे प्रकरण की जांच तत्काल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जानी चाहिए। तेजस्वी ने कहा कि पहले दो कोचिंग संस्थानों में हिंसक झड़प होना और उसके बाद एक मुख्य किरदार के भाई की रहस्यमयी मौत होना, यह साबित करता है कि परदे के पीछे कुछ बहुत बड़ा छिपाया जा रहा है।
खान सर की सफाई: ‘आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और झूठे हैं’
दूसरी तरफ, अपने ऊपर लगे इन बेहद गंभीर और तीखे आरोपों पर खान सर (फैजल खान) ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह से मनगढ़ंत और बेबुनियाद बताया है। खान सर ने कहा, “प्रेंस यादव की मौत बेहद दुखद है और एक युवा की इस तरह जान जाना किसी भी परिवार के लिए असहनीय है। लेकिन इस घटना से मेरा या मेरे संस्थान का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। कुछ लोग अपनी व्यक्तिगत रंजिश और हताशा के कारण मेरा नाम इस विवाद में घसीट रहे हैं।”
खान सर ने आगे कहा कि वह खुद इस मामले की एक स्वतंत्र और व्यापक जांच के पक्ष में हैं। उन्होंने जांच एजेंसियों से अपील की है कि वे किसी के बयानों में बहने के बजाय केवल वैज्ञानिक साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और होटल के घटनाक्रम के आधार पर सच को सामने लाएं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
क्या हैं वो अनुत्तरित सवाल, जिन पर टिकी है सबकी नजर?
यह पूरा मामला अब किसी बॉलीवुड सस्पेंस थ्रिलर फिल्म की तरह उलझ चुका है। जनता और जांच एजेंसियों के सामने कई ऐसे यक्ष प्रश्न हैं, जिनके जवाब मिलने अभी बाकी हैं:
- प्रिंस यादव पटना के इतने बड़े विवाद के तुरंत बाद नेपाल क्यों गए थे?
- क्या नेपाल के उस होटल में उनके साथ कोई और भी मौजूद था?
- मौत से ठीक पहले उन्होंने आखिरी फोन कॉल किसे किया था और उनके मोबाइल से क्या कोई डेटा डिलीट किया गया है?
- क्या यह वाकई दो कोचिंग संस्थानों के बीच व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा (Corporate Rivalry) का खूनी नतीजा है?
जांच के नतीजों का इंतजार
वर्तमान स्थिति की बात करें तो किसी भी जांच एजेंसी या अदालत ने अभी तक खान सर या किसी अन्य व्यक्ति को इस मौत के लिए सीधे तौर पर दोषी नहीं माना है। जब तक नेपाल पुलिस की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट और बिहार पुलिस की पूरक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक दोनों ओर से लगाए जा रहे आरोप केवल आरोप ही रहेंगे। लेकिन एक बात तो साफ है कि इस घटना ने बिहार की करोड़ों रुपये की कोचिंग इंडस्ट्री के उस काले और हिंसक पहलू को उजागर कर दिया है, जिसे अब तक शिक्षा के मंदिर के पीछे छुपा कर रखा गया था।
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