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लखपति दीदी योजना से बदली सरगुजा की अनीता प्रजापति और समीरा सिंह की किस्मत, स्वरोजगार अपनाकर बनीं आत्मनिर्भर

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में लखपति दीदी योजना से ग्रामीण महिलाएं बन रही हैं आत्मनिर्भर। जानिए ज्योति स्वयं सहायता समूह से जुड़कर कैसे बदली अनीता और समीरा की किस्मत।

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सरगुजा (छत्तीसगढ़)। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी ‘लखपति दीदी योजना’ छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में बड़ा सामाजिक और आर्थिक बदलाव ला रही है। सरगुजा जिले में महिला स्वयं सहायता समूहों के जरिए मिल रही आर्थिक मदद और नए रोजगारों ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भरता की एक नई राह दिखाई है। जिले के ग्राम पूटा की रहने वाली अनीता प्रजापति और समीरा सिंह इस योजना का लाभ उठाकर आज स्वरोजगार के जरिए अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हैं और दूसरी महिलाओं के लिए एक बड़ी मिसाल बन गई हैं।

आर्थिक तंगी से आत्मनिर्भरता तक का सफर

अपनी पुरानी जिंदगी को याद करते हुए अनीता प्रजापति ने बताया कि कुछ समय पहले तक उनका जीवन केवल घर-परिवार और घरेलू कामकाज की जिम्मेदारियों तक ही सीमित था। वे खुद का कोई छोटा-मोटा काम या स्वरोजगार शुरू करना चाहती थीं, लेकिन परिवार की बेहद खराब आर्थिक स्थिति के कारण वे ऐसा नहीं कर पा रही थीं। इसी दौरान उन्हें जिला पंचायत के माध्यम से महिलाओं के लिए चल रहे स्वयं सहायता समूहों (SHG) की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अपनी सहेली समीरा सिंह के साथ मिलकर ‘ज्योति समूह’ की सदस्यता ली और बैंक से लोन (ऋण) लेकर आगे बढ़ने का फैसला किया।

सरकारी सहयोग से मिले आय के नए साधन

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के विशेष मार्गदर्शन और सहयोग से दोनों ही महिलाओं को उनकी योग्यता के अनुसार अलग-अलग रोजगार के साधन उपलब्ध कराए गए:

  • सामुदायिक शौचालय का संचालन: अनीता प्रजापति को उनके गांव में बने सामुदायिक शौचालय के बेहतर रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस काम से उन्हें न केवल नियमित रूप से कमाई का एक जरिया मिला, बल्कि उनके इस प्रयास से गांव की साफ-सफाई व्यवस्था को भी एक नई मजबूती मिली है।
  • पर्यटकों को सुविधा: अनीता ने बताया कि उनके गांव के नजदीक एक प्रसिद्ध दर्शनीय (पर्यटन) स्थल है, जिसके कारण वहां हर दिन भारी संख्या में सैलानी आते हैं। इन पर्यटकों को अब इस सामुदायिक शौचालय की वजह से काफी सुविधा मिल रही है।
  • किराना दुकान की शुरुआत: दूसरी तरफ, समीरा सिंह को जिला पंचायत की तरफ से पूरी तरह से निशुल्क एक दुकान आवंटित की गई। समीरा ने इस दुकान में अपनी खुद की किराना दुकान खोल ली। चूंकि ग्राम पूटा में पहले कोई बड़ी किराना दुकान नहीं थी, इसलिए ग्रामीणों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के सामान के लिए काफी दूर जाना पड़ता था। अब समीरा की दुकान खुलने से गांव वालों को घर के पास ही सारा सामान आसानी से मिल जाता है।

हर महीने ₹10,000 की कमाई और घर आई स्कूटी

समीरा सिंह के अनुसार, इस किराना दुकान से उन्हें हर महीने लगभग 10 हजार रुपये की शुद्ध आमदनी हो रही है, जिससे उनके परिवार की माली हालत में बहुत बड़ा सुधार आया है। दोनों महिलाओं का कहना है कि पहले उन्हें अपनी और बच्चों की छोटी से छोटी जरूरतों के लिए भी पति के सामने हाथ फैलाना पड़ता था। लेकिन आज लखपति दीदी योजना के कारण वे अपने दम पर घर का राशन ला रही हैं, बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला रही हैं और भविष्य के लिए बचत भी कर पा रही हैं। अपनी खुद की कमाई के पैसों से दोनों आत्मनिर्भर महिलाओं ने एक स्कूटी भी खरीदी है, जिससे अब उनका कहीं भी आना-जाना बेहद आसान और सुविधाजनक हो गया है।

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