HomeEducationयोगी सरकार ला रही है भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर 2026, स्कूलों में...

योगी सरकार ला रही है भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर 2026, स्कूलों में साइन लैंग्वेज की ट्रेनिंग

उत्तर प्रदेश के परिषदीय और कस्तूरबा विद्यालयों में 13 से 19 मई 2026 तक 'भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026' आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में बच्चों को नियमित पढ़ाई के साथ भारतीय भाषाओं और इंडियन साइन लैंग्वेज (ISL) की बुनियादी जानकारी दी जाएगी।

-Advertisement-
Join whatsapp channel Join Now
Join Telegram Group Join Now

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार नई शिक्षा नीति-2020 को लागू करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। प्रदेश के परिषदीय और कस्तूरबा विद्यालयों में 13 से 19 मई 2026 तक ‘भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026’ आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में बच्चों को नियमित पढ़ाई के साथ भारतीय भाषाओं और इंडियन साइन लैंग्वेज (ISL) की बुनियादी जानकारी दी जाएगी। यह कार्यक्रम बहुभाषावाद, संवाद कौशल और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।

भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026 का उद्देश्य

यह शिविर बच्चों को अपनी मातृभाषा के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं से जोड़ने का काम करेगा। सरकार का मानना है कि भाषा सिर्फ बोलने का माध्यम नहीं है, बल्कि संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय एकता को जोड़ने वाली मजबूत कड़ी है। सात दिन के इस शिविर में छात्र-छात्राएं व्यावहारिक गतिविधियों के जरिए भाषाई कौशल विकसित करेंगे।

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), बीएसए और खंड शिक्षा अधिकारियों को शिविर की मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा गया है। यह पहल नई शिक्षा नीति-2020 के विजन को स्कूल स्तर पर उतारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

बहुभाषावाद को मिलेगा बढ़ावा

शिविर के दौरान बच्चे अपनी मातृभाषा के साथ-साथ दूसरी भारतीय भाषाओं में भी बुनियादी संवाद सीखेंगे। गतिविधियां ऐसी होंगी कि बच्चे भाषाओं के प्रति सम्मान विकसित करें और बहुभाषावाद की समझ बढ़े।

सरकार का फोकस केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है। बच्चों को भारतीय संस्कृति, विविधता और सामाजिक संवेदनशीलता से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी गतिविधियां बच्चों की संवाद क्षमता को मजबूत करती हैं और राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित करती हैं।

इंडियन साइन लैंग्वेज को पहली बार शामिल किया गया

इस बार की सबसे खास बात यह है कि पहली बार इंडियन साइन लैंग्वेज (ISL) को शिविर से जोड़ा गया है। दिव्यांग बच्चों और सामान्य बच्चों दोनों को सांकेतिक भाषा की बुनियादी जानकारी दी जाएगी। इससे समाज में समावेश और संवेदनशीलता बढ़ेगी।

यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और RPwD एक्ट-2016 के अनुरूप है। एससीईआरटी पीएम ई-विद्या चैनल के जरिए इंडियन साइन लैंग्वेज से जुड़ी शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराएगा। शिक्षक और छात्र दोनों इसका फायदा ले सकेंगे।

समावेशी शिक्षा और सामाजिक संवेदनशीलता

योगी सरकार शिक्षा को व्यापक रूप में देख रही है। स्कूलों को सिर्फ पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों को विकसित करने का माध्यम बनाया जा रहा है। भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026 आने वाले समय में बच्चों में भाषाई समझ, संवाद क्षमता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाला अभियान साबित हो सकता है।

शिविर में भाग लेने वाले बच्चे न सिर्फ भाषाएं सीखेंगे बल्कि एक-दूसरे की संस्कृति और परंपराओं को भी समझेंगे। इससे विविधता में एकता का संदेश मजबूत होगा।

भविष्य की तैयारी

यह कार्यक्रम लंबे समय में नई पीढ़ी को भारतीय भाषाई विरासत से जोड़ने में मदद करेगा। सरकार का प्रयास है कि बच्चे आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शिविर को सफल बनाने के लिए सभी जरूरी तैयारियां पूरी की जाएं।

इस पहल से अभिभावक और शिक्षाविद दोनों उम्मीद जताते दिख रहे हैं कि बच्चों का समग्र विकास होगा और वे बेहतर संवाद कौशल के साथ तैयार होंगे।

Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Women Express पर. Hindi News और India News in Hindi  से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related News

Delhi epaper

Prayagraj epaper

Kurukshetra epaper

Ujjain epaper

Latest News