नई दिल्ली। हाल ही में प्रशासनिक सेवा से त्यागपत्र देकर चर्चा में आईं उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की लोकप्रिय IAS अधिकारी दिव्या मित्तल का सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। ऑल इंडिया 68वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनने वाली दिव्या ने यह मुकाम आईआईटी दिल्ली, आईआईएम बैंगलोर से पढ़ाई और लंदन की हाई-पेइंग जॉब छोड़कर हासिल किया था।
लंदन की नौकरी छोड़ भारत लौटीं, पहले ही प्रयास में पास की परीक्षा
23 नवंबर 1983 को एक सामान्य परिवार में जन्मी दिव्या मित्तल बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में काफी होशियार थीं। 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उनका दाखिला देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी दिल्ली में हुआ। इसके बाद उन्होंने आईआईएम बैंगलोर से एमबीए (MBA) की डिग्री पूरी की।
पढ़ाई खत्म होते ही उन्हें लंदन में एक बड़ी कंपनी में नौकरी मिल गई। विदेश में लग्जरी लाइफस्टाइल और शानदार पैकेज होने के बाद भी उनका मन अपने देश में प्रशासनिक सेवा के जरिए बदलाव लाने का था। आखिरकार वे लंदन से भारत वापस आ गईं और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी में जुट गईं। अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने यूपीएससी क्रैक कर आईपीएस (IPS) का पद हासिल किया, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य आईएएस बनना ही था।
2013 में पाई ऑल इंडिया 68वीं रैंक, बनीं यूपी कैडर की आईएएस
आईएएस बनने का सपना पूरा करने के लिए दिव्या मित्तल ने अपनी मेहनत जारी रखी और साल 2013 की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 68वीं रैंक हासिल कर ली। इसके बाद उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित हुआ।
13 वर्षों के अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान वे एक सख्त, जनहितैषी और बेहद तेजतर्रार अधिकारी के रूप में पहचानी गईं। उन्होंने मिर्जापुर, देवरिया और बस्ती जैसे जिलों में जिलाधिकारी (DM) के रूप में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी।
आईएएस पति और दो बेटियां: सोशल मीडिया पर साझा किया था वर्क-लाइफ बैलेंस का दर्द
दिव्या मित्तल का व्यक्तिगत जीवन भी प्रशासनिक जिम्मेदारियों से भरा हुआ है। उनके पति गगनदीप सिंह ढिल्लों भी यूपी कैडर के ही एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। दंपत्ति की दो छोटी बेटियां हैं।
सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली दिव्या मित्तल ने वर्ष 2025 में अपनी एक पोस्ट में लिखा था कि दो छोटी बेटियों की परवरिश करना एक मां के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण काम है। उन्होंने लिखा था कि सरकारी काम की भारी व्यस्तता और बच्चों के पालन-पोषण के बीच सही तालमेल (Work-Life Balance) बिठाना काफी मुश्किल होता है, जिसके लिए कोई भी ट्रेनिंग पूरी नहीं पड़ती।
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