भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) ने डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, यह मिशन अब दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल हेल्थ नेटवर्क में से एक बन चुका है। इस योजना के तहत अब तक 104 करोड़ से अधिक डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड (Health Records) को 93 करोड़ से ज्यादा आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA ID) के साथ सफलतापूर्वक जोड़ा जा चुका है।
क्या है आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और इसके फायदे?
सितंबर 2021 में शुरू किए गए इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश के हर नागरिक को एक सुरक्षित और सुलभ डिजिटल स्वास्थ्य ढांचा प्रदान करना है। इसके तहत बनने वाला ‘आभा’ (ABHA) कार्ड हर नागरिक के लिए एक यूनीक डिजिटल हेल्थ आईडी के रूप में काम करता है।
इस डिजिटल व्यवस्था से मरीजों और स्वास्थ्य प्रणाली को कई बड़े फायदे हो रहे हैं:
- कागजी झंझट से मुक्ति: अब मरीजों को डॉक्टर के पास जाने के लिए पुराने पर्चे, एक्स-रे या लैब रिपोर्ट की फाइलें साथ ले जाने की ज़रूरत नहीं है। सभी मेडिकल रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहते हैं।
- इलाज में आसानी: मरीज की सहमति मिलने पर डॉक्टर, अस्पताल, लैब और बीमा कंपनियां एक ही जगह से पुरानी मेडिकल हिस्ट्री देख सकते हैं, जिससे सही इलाज तुरंत शुरू हो पाता है।
- अस्पतालों में कम समय: इस तकनीक से अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन काउंटरों पर लगने वाली लंबी कतारें और मरीजों का इंतजार का समय काफी कम हो गया है।
आरोग्य सेतु 2.0 और ‘स्कैन एंड शेयर’ तकनीक
सरकार ने इस मिशन को और मजबूत बनाने के लिए आरोग्य सेतु 2.0 ऐप लॉन्च किया है। इस डिजिटल हेल्थ ऐप के जरिए लोग आसानी से अपना एबीएचए अकाउंट बना सकते हैं, अस्पताल की अपॉइंटमेंट ले सकते हैं, ऑनलाइन डॉक्टर से सलाह (टेली-कंसल्टेशन) ले सकते हैं और स्मार्ट वॉच जैसे वियरेबल डिवाइस से अपनी सेहत को ट्रैक कर सकते हैं।
इसके अलावा, नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) की ‘स्कैन एंड शेयर’ सेवा ने ओपीडी (OPD) पंजीकरण को बेहद तेज कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, 18 जून तक देश भर के अस्पतालों में इसके जरिए 23.21 करोड़ से अधिक डिजिटल टोकन जारी किए जा चुके हैं।
छोटे क्लीनिकों के लिए ‘ई-सुश्रुत क्लिनिक’
स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार अब तक अस्पतालों को 107 करोड़ रुपये, लैब्स व फार्मेसी को 2.95 करोड़ रुपये और डिजिटल कंपनियों को 26 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि दे चुकी है। साथ ही, छोटे क्लीनिकों की मदद के लिए सी-डीएसी (C-DAC) द्वारा विकसित ‘ई-सुश्रुत क्लिनिक’ प्लेटफॉर्म से 2,200 से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों को जोड़ा गया है, ताकि छोटे स्तर पर भी मरीजों के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण आसानी से हो सके।
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