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हरियाली के बीच पढ़ाई! गुजरात का जामनसोढा स्कूल बना मॉडल, प्रकृति से जुड़कर बच्चों को मिल रहा सीखने का अवसर

Jamansodha Primary School Dang: गुजरात के डांग जिले के सुबीर तालुका में स्थित जामनसोढा प्राथमिक स्कूल में बच्चों को स्नेक प्लांट और सागौन की नक्काशीदार लाइब्रेरी के बीच ग्रीन एजुकेशन दी जा रही है। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

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डांग। Jamansodha Primary School: गुजरात का डांग जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यहाँ का एक सरकारी स्कूल शिक्षा और पर्यावरण के अनूठे मेल के कारण पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है। डांग जिले के सुबीर तालुका में स्थित ‘जामनसोढा प्राथमिक स्कूल’ ने आधुनिक शिक्षा को प्रकृति के साथ जोड़कर एक शानदार मिसाल कायम की है। केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति (NEEP) के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर उतारते हुए इस विद्यालय में बच्चों को पूरी तरह से हरे-भरे, साफ-सुथरे और प्रदूषण मुक्त माहौल में पढ़ाया जा रहा है।

स्कूल का मुख्य उद्देश्य सिर्फ किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर बचपन से ही प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता जगाना और उन्हें एक स्वस्थ जीवनशैली की तरफ ले जाना है।

क्लासरूम के भीतर लगे हैं स्नेक प्लांट, ग्रामीणों ने दिया साथ

स्कूल परिसर को सुंदर और स्वास्थ्यवर्धक बनाने के लिए यहाँ चारों तरफ बड़े पैमाने पर पेड़-पौधे लगाए गए हैं। विद्यालय की पूरी इमारत, कक्षाओं की बनावट और पूरे कैंपस का डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि बच्चों को हर पल प्रकृति के करीब होने का एहसास हो। स्कूल के एक समर्पित शिक्षक राजेशभाई टंडेल ने बताया कि परिसर को हरा-भरा बनाने के इस सफर की शुरुआत स्थानीय ग्रामीणों के सक्रिय सहयोग से हुई थी। गांव के लोगों ने मिलकर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया।

Jamansodha Primary School: गुजरात का जामनसोढा स्कूल बना पर्यावरण और शिक्षा का मॉडल
हरियाली के बीच पढ़ाई! गुजरात का जामनसोढा स्कूल बना मॉडल, प्रकृति से जुड़कर बच्चों को मिल रहा सीखने का अवसर

इस मुहिम की सबसे खास बात यह है कि कक्षाओं के भीतर ‘इंडोर प्लांट्स’ लगाए गए हैं। विशेष रूप से क्लासरूम में स्नेक प्लांट (Snake Plant) रखे गए हैं, जो हवा को शुद्ध करने और कमरे में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। इस बेहतरीन सोच से बच्चों को पढ़ाई के दौरान चौबीसों घंटे शुद्ध हवा मिल रही है।

ड्रॉपआउट रेट में आई कमी, बच्चों में बढ़ा उत्साह

स्कूल के इस प्राकृतिक और शांत माहौल का सीधा सकारात्मक असर बच्चों की सेहत, उनकी एकाग्रता (Focus) और सीखने की क्षमता पर साफ दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों और स्कूल प्रबंधन के अनुसार, स्वच्छ हवा और शांत वातावरण के कारण अब बच्चों का स्कूल आने का उत्साह काफी बढ़ गया है। इसका एक बड़ा फायदा यह हुआ है कि स्कूल में बच्चों का ड्रॉपआउट रेट (बीच में पढ़ाई छोड़ने की दर) बहुत कम हो गया है।

जामनसोढा गांव के सरपंच वसंतभाई ने बताया कि इस हरियाली वाली पहल के बाद बच्चों के व्यवहार में बड़ा बदलाव आया है। वे अब पर्यावरण संरक्षण के प्रति काफी जागरूक हो चुके हैं और हर दिन नियमित रूप से स्कूल आ रहे हैं।

कचरा प्रबंधन और सागौन की लकड़ी से बनी खास लाइब्रेरी

जामनसोढा प्राथमिक स्कूल में विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करने के लिए उन्हें किताबों से बाहर निकालकर व्यावहारिक ज्ञान भी दिया जा रहा है:

  • वेस्ट मैनेजमेंट और रीसाइक्लिंग: बच्चों को कचरा प्रबंधन और पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों में शामिल किया जाता है। यहाँ ‘बेस्ट फ्रॉम वेस्ट’ (बेकार चीजों से बेहतरीन सामान बनाना) जैसी क्रिएटिव एक्टिविटी कराई जाती हैं, जिससे बच्चों में रचनात्मक सोच और नवाचार को बढ़ावा मिलता है।
  • आकर्षक नक्काशीदार पुस्तकालय: इस स्कूल की एक और बड़ी यूएसपी (खासियत) यहाँ की अनोखी लाइब्रेरी है। इस पुस्तकालय को सागौन की लकड़ी पर बेहद खूबसूरत और बारीक नक्काशी करके तैयार किया गया है। पुस्तकालय का यह आकर्षक और ज्ञानवर्धक माहौल बच्चों को अपनी तरफ खींचता है, जिससे उनमें कम उम्र से ही किताबें पढ़ने की आदत और नई चीजें सीखने की जिज्ञासा पैदा हो रही है।

संक्षेप में कहें तो, डांग के इस जामनसोढा स्कूल में शिक्षा का दायरा सिर्फ चारदीवारी तक सीमित नहीं है। यहाँ बच्चों को अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, जिम्मेदारी की भावना और अच्छे संस्कारों के साथ एक जिम्मेदार नागरिक बनने का संपूर्ण प्रशिक्षण मिल रहा है।

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