Pregnancy Glow: गर्भावस्था के नौ महीने किसी भी महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और खूबसूरत पड़ाव होते हैं। इस दौरान महिला के शरीर के भीतर कई तरह के बड़े बदलाव होते हैं। इन आंतरिक परिवर्तनों का सीधा असर सिर्फ महिला की सेहत पर ही नहीं पड़ता, बल्कि उनकी त्वचा और चेहरे पर भी साफ नजर आता है। आपने अक्सर बड़े-बुजुर्गों या सहेलियों को यह कहते सुना होगा कि ‘प्रेग्नेंसी में चेहरे पर एक अलग ही रौनक या चमक आ गई है।’
इसे विज्ञान की भाषा में ‘प्रेग्नेंसी ग्लो’ कहा जाता है। यह पूरी तरह से शरीर में होने वाले प्राकृतिक बदलावों का ही नतीजा होता है। हालांकि, यह भी सच है कि हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए यह जरूरी नहीं कि हर गर्भवती महिला के चेहरे पर यह निखार एक जैसा ही दिखाई दे।
क्या होता है प्रेग्नेंसी ग्लो और यह कब दिखता है?
चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, प्रेग्नेंसी ग्लो का सीधा मतलब यह है कि गर्भावस्था के दौरान महिला का चेहरा पहले के मुकाबले कहीं अधिक साफ, तरोताजा और चमकदार दिखाई देने लगता है। कई महिलाओं के गाल प्राकृतिक रूप से हल्के गुलाबी नजर आने लगते हैं। आमतौर पर यह खूबसूरत बदलाव गर्भावस्था के चौथे महीने के बाद यानी दूसरी तिमाही (सेकंड ट्राइमेस्टर) में ज्यादा उभरकर सामने आता है।
शुरुआत के शुरुआती तीन महीनों में महिलाओं को उल्टी (मॉर्निंग सिकनेस), अत्यधिक थकान और कमजोरी का सामना करना पड़ता है, लेकिन जैसे-जैसे शरीर इस नए बदलाव को स्वीकार कर लेता है, चेहरे पर यह प्राकृतिक निखार आने लगता है।
इन 4 मुख्य कारणों से बढ़ता है चेहरे का निखार
इस प्राकृतिक चमक के पीछे शरीर के भीतर चल रही कई जैविक प्रक्रियाएं जिम्मेदार होती हैं:
- हार्मोन्स का उतार-चढ़ाव: गर्भावस्था के समय महिला के शरीर में कई तरह के हार्मोन्स का उत्पादन पहले से बहुत ज्यादा होने लगता है। इन बढ़े हुए हार्मोन्स का सीधा और सकारात्मक प्रभाव त्वचा की कोशिकाओं पर पड़ता है। इससे त्वचा में रक्त का संचार बेहतर होता है, जिससे चेहरा बिना किसी बाहरी क्रीम, फेशियल या मेकअप के भी पूरी तरह निखरा हुआ महसूस होता है।
- ब्लड सर्कुलेशन में भारी बढ़ोतरी: डॉक्टरों के मुताबिक, गर्भ में पल रहे शिशु और मां दोनों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इस दौरान महिला के शरीर में खून (रक्त) की कुल मात्रा काफी बढ़ जाती है। जब यह अतिरिक्त खून पूरे शरीर में तेजी से प्रवाहित होता है, तो चेहरे की बेहद बारीक और छोटी नसों तक भी भरपूर ऑक्सीजन और रक्त पहुंचता है। इसी वजह से गालों पर एक सुंदर लालिमा आ जाती है, जिसे लोग प्रेग्नेंसी ग्लो कहते हैं।
- प्राकृतिक तेल (सीबम) का अधिक बनना: इस अवधि में त्वचा की ग्रंथियां पहले से ज्यादा प्राकृतिक तेल का निर्माण करने लगती हैं। यह तेल चेहरे को रूखेपन से बचाता है और उसे मुलायम व चमकदार बनाए रखता है। हालांकि, जिन महिलाओं की त्वचा पहले से ही बहुत ज्यादा ऑयली (तैलीय) होती है, उन्हें इस तेल के कारण चेहरे पर मुंहासों (पिंपल्स) की समस्या भी हो सकती है। इसलिए गर्भावस्था में पिंपल्स होना भी एक सामान्य शारीरिक बदलाव ही है।
- शारीरिक गर्माहट और त्वचा का खिंचाव: जैसे-जैसे गर्भ में शिशु का विकास होता है, महिला के शरीर की त्वचा में खिंचाव आता है। इसके साथ ही शरीर के भीतर का तापमान और गर्माहट भी थोड़ी बढ़ जाती है। कई गर्भवती महिलाओं को इस दौरान सामान्य से अधिक गर्मी का अहसास होता है, जो चेहरे पर हल्की लाली और चमक के रूप में दिखाई देता है।
अच्छे खानपान और पोषण का सीधा असर
गर्भावस्था के दौरान महिला जो कुछ भी खाती है, उसका सीधा आईना उनका चेहरा होता है। यदि गर्भवती महिला अपने दैनिक आहार में ताजे मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, दूध, दही, पनीर, अंडा या प्रोटीन से भरपूर संतुलित भोजन को शामिल करती है और दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीती है, तो इसका अचूक लाभ उनकी त्वचा को मिलता है। शरीर को अंदरूनी रूप से जरूरी विटामिन्स और पोषक तत्व मिलने से त्वचा स्वस्थ, बेदाग और अंदर से ग्लोइंग बनती है।
Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Women Express पर. Hindi News और India News in Hindi से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

