रायपुर। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और प्रकृति को सुरक्षित करने के उद्देश्य से पौधे लगाना आज के दौर की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। पेड़ न केवल वायुमंडल को स्वच्छ कर हमें प्राणवायु (ऑक्सीजन) प्रदान करते हैं, बल्कि वे तापमान नियंत्रण, भूमि कटाव को रोकने और भूजल स्तर को बढ़ाने में भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। वर्षा ऋतु को पौधे रोपने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त समय माना जाता है, क्योंकि प्राकृतिक बारिश से पौधों को पनपने का अनुकूल माहौल मिलता है।
इसी श्रृंखला में छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के दिशा-निर्देशों के तहत बलौदाबाजार वनमंडल के बल्दाकछार वन परिक्षेत्र में परिक्षेत्र स्तरीय ‘वन महोत्सव’ का आयोजन किया गया। इस दौरान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया और स्थानीय नागरिकों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।
अर्जुनी (ब) गौठान में रोपे गए छायादार व उपयोगी पौधे
इस वन महोत्सव के तहत ग्राम अर्जुनी (ब) स्थित गौठान परिसर में फलदार, छायादार और औषधीय गुणों वाले स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने न केवल पौधे रोपे, बल्कि उन्हें सुरक्षित बड़ा करने और नियमित सिंचाई करने का सामूहिक संकल्प लिया।
- प्रमुख अभियान : ‘एक पेड़ माँ के नाम’ (वन महोत्सव 2026)
- मुख्य स्थल : बल्दाकछार वन परिक्षेत्र, ग्राम अर्जुनी (ब) गौठान
- मार्गदर्शक : केदार कश्यप (वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री)
- मुख्य अधिकारी : धम्मशील गणवीर (DFO), सुश्री एकता कर (प्रभारी RO)
- भागीदारी : जनप्रतिनिधि, वन समितियां, छात्र व स्थानीय ग्रामीण
जनभागीदारी से पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा
कार्यक्रम में बलौदाबाजार के वनमंडलाधिकारी (DFO) धम्मशील गणवीर और प्रभारी वन परिक्षेत्र अधिकारी सुश्री एकता कर सहित वन विभाग का अमला मौजूद रहा। इनके साथ ही जनपद सदस्यों, ग्राम सरपंचों, वन प्रबंधन समितियों के पदाधिकारियों, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी की।
DFO धम्मशील गणवीर ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि केवल पौधा लगा देना ही काफी नहीं है, बल्कि जब तक वह एक मजबूत पेड़ न बन जाए, तब तक उसकी सुरक्षा करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके लिए ट्री-गार्ड लगाने और नियमित देखभाल करने की अपील की गई।
भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी
वनमंडलाधिकारी ने कहा कि वन मंत्री के मार्गदर्शन में चल रहा ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। यह पहल आम जनता के भीतर प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का काम कर रही है। पेड़-पौधे पक्षियों व वन्यजीवों का प्राकृतिक आश्रय स्थल हैं और स्वच्छ हवा में सांस लेने का इकलौता माध्यम हैं।
जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और स्थानीय समुदायों के साझा प्रयासों से बलौदाबाजार जिले में पर्यावरण संवर्धन को एक नई ऊर्जा मिली है, जो प्रदेश के हरित और सुरक्षित भविष्य का आधार बनेगी।
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