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कभी आर्थिक तंगी से परेशान थीं अनीता गंधर्व, आज महतारी वंदन योजना के दम पर खड़ा किया खुद का रोजगार

Mahtari Vandan Yojana: महतारी वंदन योजना की ₹1000 सहायता से मुंगेली की अनीता गंधर्व ने शुरू की मनिहारी व सिलाई दुकान। अब रोजाना कमा रही हैं ₹500 से ₹1000 तक।

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की फ्लैगशिप योजना ‘महतारी वंदन योजना’ राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हर महीने सीधे बैंक खाते में मिलने वाली ₹1,000 की वित्तीय सहायता महिलाओं के लिए न केवल दैनिक जरूरतों को पूरा करने का जरिया बनी है, बल्कि इसने उन्हें छोटे-छोटे स्वरोजगार स्थापित कर खुद के पैरों पर खड़े होने का हौसला भी दिया है। ऐसी ही एक सुखद और प्रेरणादायक मिसाल पेश की है मुंगेली विकासखंड के ग्राम घुठेरा की रहने वाली श्रीमती अनीता गंधर्व ने।

आर्थिक तंगी से निकलकर आत्मनिर्भर बनने का सफर

अनीता गंधर्व बताती हैं कि एक समय उनके परिवार की वित्तीय स्थिति बेहद चिंताजनक थी। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, घर का राशन और रोजमर्रा के छोटे-छोटे खर्चों को संभालना काफी चुनौतीपूर्ण था। कई बार संसाधनों के अभाव में परिवार को कड़े वित्तीय संकट से गुजरना पड़ता था।

इसी बीच, जब राज्य सरकार की ओर से महतारी वंदन योजना के तहत प्रति माह ₹1,000 की किश्त उनके खाते में आने लगी, तो उन्होंने इस पैसे को सिर्फ रोजमर्रा के खर्चों में बहाने के बजाय बचत करने का फैसला किया।

छोटी सी बचत से खड़ा किया खुद का व्यवसाय

योजना से मिली राशि में से थोड़ी-थोड़ी बचत करके अनीता ने मुंगेली स्थित पुराने बस स्टैंड के पास एक छोटी सी मनिहारी और सिलाई की दुकान की नींव रखी। शुरुआती दौर में साधन सीमित थे, लेकिन उनके हुनर, ग्राहकों के साथ मधुर व्यवहार और गुणवत्तापूर्ण सिलाई के कारण दुकान धीरे-धीरे जमने लगी।

आज उनकी दुकान में सौंदर्य-प्रसाधन और दैनिक जरूरत के मनिहारी सामान उपलब्ध हैं। इसके साथ ही वे कपड़े सिलने का काम भी करती हैं, जिससे उन्हें नियमित रूप से आर्थिक लाभ हो रहा है।

रोजाना 500 से 1,000 रुपये तक की कमाई

अनीता गंधर्व के अनुसार, अब वे अपनी दुकान के जरिए हर दिन औसतन 500 से 1,000 रुपये की सीधी कमाई कर लेती हैं। इस स्वतंत्र आय से वे न केवल अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा का खर्च उठा पा रही हैं, बल्कि घरेलू जरूरतों में भी परिवार का हाथ बंटा रही हैं।

अब उन्हें किसी भी छोटी-बड़ी आर्थिक जरूरत के लिए दूसरों पर आश्रित नहीं रहना पड़ता। अनीता ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि हर महीने आने वाली यह वित्तीय सहायता महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास और नई ऊर्जा का संचार कर रही है। यदि महिलाएं इस सहायता राशि का सही बचत और स्वरोजगार में इस्तेमाल करें, तो वे अपने परिवार को गरीबी के चक्र से बाहर निकाल सकती हैं।

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