नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को ‘पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा की शुरुआत हुई। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में विधेयक पेश करते हुए स्पष्ट किया कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाले पेपर लीक, संगठित घोटालों और अनुचित गतिविधियों पर पहले से अधिक कठोरता से अंकुश लगाना है। उन्होंने दोहराया कि सरकार युवाओं और विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह संशोधन 2024 में बने मूल कानून को और अधिक असरदार बनाने के लिए प्रधानमंत्री के निर्देशों के बाद लाया गया है। 2024 के कानून का लक्ष्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना था, परंतु अब इसे और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की गई।
फास्ट ट्रैक कोर्ट: 5 महीने में पूरी होगी जांच से लेकर सजा तक की प्रक्रिया
विधेयक के सबसे महत्वपूर्ण पहलू की जानकारी देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि संशोधन के तहत स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट (Special Fast Track Court) की व्यवस्था की गई है।
जांच और सुनवाई की नई समय-सीमा:
- जांच प्रक्रिया: पेपर लीक और परीक्षा धांधली के मामलों की जांच 2 महीने के अंदर पूरी करनी होगी।
- अदालती सुनवाई: ट्रायल कोर्ट में अगले 3 महीने के भीतर केस की सुनवाई पूरी कर अंतिम फैसला सुनाना अनिवार्य होगा।
- अपील का नियम: यदि कोई पक्ष फैसले के खिलाफ अपील करना चाहता है, तो उसे 30 दिनों के भीतर अपील करनी होगी। साथ ही ऐसे मामलों की सुनवाई हाई कोर्ट में डबल बेंच से नहीं होगी।
इस प्रकार, किसी भी घटना के सामने आने से लेकर आरोपी को सजा मिलने तक अधिकतम 5 महीने का समय लगेगा। मंत्री ने बताया कि कानून मंत्रालय ने स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
कांग्रेस के कार्यकाल की नाकामियों पर साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि पेपर लीक की घटनाएं किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रही हैं। वर्ष 2009 के रेलवे भर्ती परीक्षा पेपर लीक और 2012 के एम्स (AIIMS) प्रवेश परीक्षा पेपर लीक जैसे बड़े मामले कांग्रेस सरकार के दौरान ही हुए थे, लेकिन तब ऐसी सख्त कार्रवाई नहीं की जाती थी।
उन्होंने बताया कि 1992 और 2010 में बनी समितियों ने केंद्रीय परीक्षा समिति बनाने की सिफारिश की थी, जिसे तत्कालीन यूपीए सरकार ने नजरअंदाज कर दिया। वर्तमान सरकार ने ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ (NTA) का गठन किया और जून 2024 में व्यापक कानून लागू किया।
समितियों की सिफारिशों और सुधारों पर जोर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन को अवगत कराया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स ने परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने हेतु कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इसके अतिरिक्त, राधाकृष्णन समिति की कुल 46 में से 35 सिफारिशों को सरकार पहले ही लागू कर चुकी है।
उन्होंने विश्वास जताया कि लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने और परीक्षा प्रणाली में खोया भरोसा वापस लौटाने के लिए लाए गए इस संशोधन का सभी दल समर्थन करेंगे।
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