वर्धा जिले के पांजरा बंगला गांव में एक जरूरतमंद महिला छबीबाई शेषराव जाधव को कोल्हापुर के एन. एन. काज़ी और स्वातंत्र्यवीर निजामुद्दीन काज़ी सद्भावना केंद्र की मदद से 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिली है। जर्जर घर की वजह से खुले आसमान के नीचे रह रही बहन को यह सहयोग नए घर बनाने में काम आएगा। यह घटना सामाजिक सद्भावना और मानवीय मदद का प्रेरणादायी उदाहरण बनी है।
मदद कैसे शुरू हुई
फरवरी 2026 में इंटीग्रेटेड सोसायटी ऑफ मीडिया प्रमोटर्स, लखनऊ के अध्यक्ष चंद्रशेखर द्वारा वर्धा में आयोजित कार्यक्रम में कोल्हापुर जिले के कबनूर निवासी एन. एन. काज़ी शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान जंगल भ्रमण का आयोजन किया गया। उसी समय पांजरा बंगला गांव में छबीबाई का टूटा-फूटा घर काज़ी जी के ध्यान में आया। घर पूरी तरह ढह चुका था और परिवार को बिना छत के रहना पड़ रहा था।
छोटी सी सभा में काज़ी जी ने छबीबाई के घर की मरम्मत कराने की इच्छा जताई। उन्होंने अपने मित्रों, रिश्तेदारों और परिचितों से सहयोग राशि जुटाई। स्वातंत्र्यवीर निजामुद्दीन काज़ी सद्भावना केंद्र, कबनूर ने भी इस काम में पूरा सहयोग दिया। कुल 50,000 रुपये की यह राशि वर्धा पहुंचाई गई।
सहायता किसके माध्यम से पहुंची
यह आर्थिक मदद वर्धा के वन्यजीव संरक्षक कौशल मिश्र, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी बी. एस. मिरगे, एबेकस अकादमी की संचालिका निलीमा मुणोत और अधिवक्ता ताम्रध्वज बोरकर के माध्यम से छबीबाई जाधव को सौंपी गई।
इस मौके पर पांजरा बंगला के सरपंच शेषराव आड़े, सहायक वन संरक्षक एम. आड़े, वन रक्षक शिवाजी सावंत और अक्षय जाधव मौजूद थे। सरपंच शेषराव आड़े और अन्य अधिकारियों ने इस मदद की सराहना की। सरपंच ने ग्राम विकास के कामों में आगे भी सहयोग देने का आश्वासन दिया।
कोल्हापुर से 1200 किमी दूर की मदद
कोल्हापुर से करीब 1200 किलोमीटर दूर रहने वाले एन. एन. काज़ी ने एक अनजान परिवार की मुश्किल को समझा और मदद का हाथ बढ़ाया। यह सहायता सिर्फ पैसे की नहीं, बल्कि इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी का बेहतरीन नमूना है। छबीबाई और गांव वाले सभी लोगों ने सद्भावना केंद्र और काज़ी जी के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस मौके पर वन विभाग के अधिकारियों और आईएसएमपी पदाधिकारियों ने छबीबाई के आंगन में वृक्षारोपण भी किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
परिवार को मिली नई उम्मीद
इस मदद से छबीबाई के परिवार को छत मिलने की उम्मीद जगी है। टूटे घर की समस्या अब दूर होने वाली है। यह घटना दिखाती है कि अच्छे इरादे और सामूहिक प्रयास से जरूरतमंद लोगों की मदद की जा सकती है। पांजरा बंगला गांव के इस मामले ने कई लोगों को प्रेरित किया है।
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