रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में आर्थिक स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। पारंपरिक खेती-किसानी तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं अब सीमेंट ईंट निर्माण जैसे गैर-कृषि उद्योगों को अपनाकर सफलता की नई इबारत गढ़ रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत मिले मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग से बस्तर जिले की महिलाएं ‘लक्ष्मी स्व-सहायता समूह’ जैसे माध्यमों से जुड़कर ‘लखपति दीदी’ के रूप में उभर रही हैं।
खेती-किसानी से आगे बढ़कर बनीं सफल उद्यमी
बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कोहकापाल के आश्रित गांव छिंदगांव की निवासी श्रीमती सुमनी कश्यप इस बदलाव की एक उज्ज्वल और प्रेरणादायी मिसाल हैं। कभी सिर्फ खेती तक सीमित रहने वाली सुमनी ने समय की जरूरत को पहचाना।
प्रधानमंत्री आवास योजना और विभिन्न सरकारी व निजी निर्माण कार्यों के चलते क्षेत्र में सीमेंट ईंटों की बढ़ती मांग को उन्होंने एक बेहतरीन अवसर के रूप में देखा। पारंपरिक कृषि पर निर्भरता कम करते हुए उन्होंने सीमेंट ईंट निर्माण इकाई (Cement Brick Manufacturing Unit) स्थापित करने का एक साहसिक कदम उठाया।
बिहान और एनआरएलएम से मिला ₹5 लाख का संबल
इस उद्यम को स्थापित करने में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के नॉन-फॉर्म (गैर-कृषि) घटक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उद्यम में वित्तीय निवेश का ब्योरा:
- सीड कैपिटल (Seed Capital): संकुल संगठन के माध्यम से ₹5 लाख की राशि उपलब्ध कराई गई।
- समूह व व्यक्तिगत निवेश: सुमनी और उनके स्व-सहायता समूह द्वारा ₹1.50 लाख का योगदान दिया गया।
- कुल लागत: ₹6.50 लाख से अधिक की लागत से आवश्यक मशीनरी, शेड और फर्श जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की गईं।
सभी तैयारियां पूरी करने के बाद अप्रैल 2026 से सीमेंट ईंटों का उत्पादन विधिवत शुरू कर दिया गया।
3 महीनों में ही 20 ट्रॉली ईंटों की बंपर बिक्री
जगदलपुर और बालेंगा क्षेत्र से डस्ट व गिट्टी जैसे कच्चे माल की आसान उपलब्धता और क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों की अधिकता के चलते सुमनी द्वारा बनाई गई ईंटों की मांग लगातार बनी हुई है। बिक्री के लिए उन्हें कहीं दूर नहीं जाना पड़ता, बल्कि ग्राहक सीधे निर्माण स्थल से ही ईंटें खरीद रहे हैं।
उत्पादन शुरू होने के शुरुआती तीन महीनों के भीतर ही उन्होंने 20 ट्रॉली सीमेंट ईंटों की बिक्री कर अपनी व्यावसायिक दक्षता साबित कर दी है।
परिवार का बेहतर भविष्य और बच्चों की उच्च शिक्षा
इस व्यवसाय से हो रही नियमित आय ने सुमनी कश्यप के परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहद मजबूत बना दिया है। आर्थिक रूप से सक्षम होने के बाद वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला पा रही हैं:
- बड़ी बेटी: 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद जगदलपुर में कंप्यूटर कोर्स के साथ कृषि प्रवेश परीक्षा (PAT) की तैयारी कर रही है।
- छोटे बेटे: दो बेटे वर्तमान में क्रमशः सातवीं और पांचवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे हैं।
दिल्ली तक मिली राष्ट्रीय पहचान
सीमेंट ईंट उद्योग के अलावा, सुमनी स्व-सहायता समूह में ‘जेंडर मास्टर’ के रूप में भी सेवा दे रही हैं, जिससे उन्हें प्रतिमाह ₹5,000 का मानदेय मिलता है। इसके अतिरिक्त वे खेती, किराना दुकान और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से भी जुड़ी हुई हैं।
अपनी बहुमुखी प्रतिभा, मेहनत और समाज में सक्रिय योगदान के बल पर सुमनी को राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली तक पहचान मिली है। उनकी यह सफलता साबित करती है कि सही वित्तीय सहयोग और मार्गदर्शन मिलने पर आदिवासी अंचल की महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था का चेहरा बदल सकती हैं।
Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Women Express पर. Hindi News और India News in Hindi से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

