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GeM पोर्टल से खरीदारी में छत्तीसगढ़ ने रचा इतिहास, सरकारी खरीद 113% बढ़कर ₹3,935 करोड़ पहुंची

छत्तीसगढ़ ने GeM पोर्टल से ₹3,935 करोड़ की रिकॉर्ड खरीद कर 113% की वृद्धि हासिल की। दिल्ली में मिला सस्टेनेबल प्रोक्योरमेंट अवॉर्ड। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

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रायपुर। गवर्नेंस में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देते हुए छत्तीसगढ़ ने ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस’ (GeM) के जरिए वित्त वर्ष 2025-26 में ₹3,935 करोड़ का डिजिटल क्रय कर 113 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की है। इस अभूतपूर्व प्रदर्शन के लिए नई दिल्ली में आयोजित मंच के 10वें स्थापना दिवस पर राज्य को ‘GeM सस्टेनेबल प्रोक्योरमेंट अवॉर्ड’ से अलंकृत किया गया।

इस डिजिटल बदलाव ने न केवल खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है, बल्कि प्रतिस्पर्धी बोलियों के दम पर सरकारी खजाने की भी बड़ी बचत की है।

डिजिटल टेंडरिंग से खजाने को ₹130 करोड़ की सीधी बचत

सरकारी महकमों में GeM के माध्यम से सामान व सेवाओं की खरीदारी से लागत में भारी कमी देखने को मिली है। पारदर्शी बोली प्रक्रिया के चलते राज्य सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में ₹130 करोड़ की वित्तीय बचत की है। यदि बीते तीन वर्षों के आंकड़ों को देखें तो डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से राज्य ने कुल ₹235 करोड़ का सार्वजनिक धन बचाया है।

सभी विभागों, निगमों और उपक्रमों की खरीदारी को एक ही डिजिटल पटल पर लाने से वस्तुओं के मूल्यों की खुली तुलना संभव हुई है। हर सौदे का ऑनलाइन रिकॉर्ड मौजूद रहने से प्रशासनिक जवाबदेही और गुणवत्ता दोनों में सुधार दर्ज किया गया है।

लघु उद्योगों और बिचौलिया-मुक्त बाजार को मिला बढ़ावा

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस ने प्रदेश के छोटे कारोबारियों और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSEs) के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य सरकार ने एमएसई क्षेत्र से ₹1,800 करोड़ की खरीदारी की, जो पिछले साल के मुकाबले 61 फीसदी अधिक है।

उल्लेखनीय है कि यह आंकड़ा सरकार द्वारा निर्धारित 25 प्रतिशत के अनिवार्य खरीद लक्ष्य से काफी ज्यादा है। अब बिना किसी मध्यस्थ या बिचौलिए के छोटे उद्यमी अपनी गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी दरों के बल पर सीधे सरकारी ऑर्डर्स हासिल कर रहे हैं।

स्टार्टअप्स, महिला व एससी/एसटी उद्यमियों की जबरदस्त भागीदारी

सरकारी खरीद का दायरा अब समाज के हर वर्ग के उद्यमियों तक पहुंच रहा है। GeM के आंकड़ों के मुताबिक:

  • स्टार्टअप्स (Startups): नए दौर के स्टार्टअप्स से सरकारी खरीद में सबसे ज्यादा 178 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़त दर्ज की गई है।
  • अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) उद्यम: इन वर्गों के व्यवसायियों को दिए जाने वाले सरकारी ऑर्डर्स में 108 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
  • महिला उद्यमी (Women Entrepreneurs): महिला संचालित व्यापारिक इकाइयों से होने वाली सरकारी क्रय दरों में 97 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

यह रुझान स्पष्ट करता है कि सरकारी टेंडर अब केवल बड़े ठेकेदारों तक सीमित न रहकर समावेशी विकास का सशक्त माध्यम बन चुके हैं।

प्रशासनिक प्रतिक्रियाएं और भावी दिशा

मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय राज्य के अधिकारियों की निष्ठा और पारदर्शी कार्यशैली को देते हुए कहा कि जनहित के कोष का विवेकपूर्ण उपयोग ही सुशासन की असली पहचान है। सरकार की नीति तकनीक के बल पर हर छोटे-बड़े उद्यमी को समान अवसर उपलब्ध कराने की है।

वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार ने स्पष्ट किया कि खुले डिजिटल बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता ही सफलता की कुंजी है। GeM ने स्थानीय उद्योगों को अपनी क्षमता साबित करने का सीधा मंच दिया है, जिससे राज्य में रोजगार और उद्यमिता का नया माहौल तैयार हो रहा है।

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