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मध्यप्रदेश में संबल योजना की 11वीं किश्त जारी, 9149 श्रमिक परिवारों को मिले 203 करोड़

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संबल योजना 2.0 की 11वीं किश्त जारी की। 9149 श्रमिक परिवारों के खातों में 203 करोड़ रुपये ट्रांसफर। राखी से पहले बड़ी राहत। सामान्य मृत्यु, दुर्घटना और दिव्यांगता पर सहायता का ब्योरा।

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भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास से संबल योजना 2.0 की 11वीं किश्त जारी की। प्रदेश के 9149 हितग्राहियों के खातों में सिंगल क्लिक से 203 करोड़ रुपये पहुंचे। राखी से ठीक पहले श्रावण के अंतिम सोमवार को मिली यह राशि हजारों श्रमिक परिवारों में उमंग लेकर आई है।

श्रमिकों की सेवा सबसे पहले

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के श्रमिक बंधुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रमिकों की सेवा, कल्याण और खुशी हमारे लिए सबसे ऊपर है। हमारे श्रमिक अपने खून-पसीने से मध्यप्रदेश की नींव रख रहे हैं। एक-एक ईंट जोड़कर प्रदेश को आगे बढ़ा रहे हैं। हर परिस्थिति में उनकी मुश्किलें दूर करना सरकार का फर्ज है। उन्होंने साफ कहा कि जब परिवार पर विपत्ति आती है, घर चलाने वाले का असामयिक निधन हो जाता है या अचानक आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है, तो कई लोग साथ छोड़ देते हैं। लेकिन हमारी सरकार कभी आपका साथ नहीं छोड़ेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना 2.0 मुश्किल वक्त में श्रमिकों को आर्थिक सहारा देती है। आज मिली 203 करोड़ की राशि इन 9149 परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। उन्होंने कहा कि संबल योजना अब तक प्रदेश के 1 करोड़ 84 लाख से ज्यादा श्रमिकों को सहारा दे चुकी है। कठिन समय में जब सब रास्ते बंद लगें, तब भी सरकार उनके साथ खड़ी है। जेब में पैसे हों तो विपत्तियों का सामना करने की हिम्मत भी आ जाती है।

बैकलॉग खत्म, निर्बाध भुगतान

डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार पिछले बैकलॉग को खत्म करते हुए श्रम सहित सभी विभागीय योजनाओं के हितग्राहियों को सहायता राशि लगातार उपलब्ध करा रही है। उन्होंने जिलों से जुड़े श्रमिक हितग्राहियों को श्रावण सोमवार और आने वाले रक्षाबंधन की मंगलकामनाएं दीं। राशि सीधे खातों में ट्रांसफर होने से परिवारों में खुशी का माहौल है।

श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा पर जोर

मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना है जहां ‘श्रम शक्ति संहिता’ लागू की गई है। इसके साथ ही ‘श्रम स्टार रेटिंग’ भी शुरू की गई है ताकि श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा से कोई समझौता न हो। सरकार श्रमिकों के हुनर को निखारकर उन्हें आगे बढ़ाना चाहती है। सहकारिता से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘श्रमणा’ योजना भी चलाई जा रही है।

गिग वर्कर्स और आयुष्मान कवर

बदलते समय में काम करने का तरीका बदल रहा है। प्रदेश के युवा अब ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए रोजगार पा रहे हैं। इनकी आर्थिक सुरक्षा के लिए गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी संबल योजना 2.0 में शामिल कर लिया गया है। गरीब परिवार की सबसे बड़ी चिंता इलाज की होती है। इसलिए संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामयम् योजना से जोड़ा गया है। जिन श्रमिक परिवारों के बच्चे मेडिकल, कानून, इंजीनियरिंग या पॉलीटेक्निक की पढ़ाई कर रहे हैं, उनकी फीस की चिंता भी सरकार कर रही है।

गर्भवती बहनों और दिव्यांगता पर मदद

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब संबल योजना की लाभार्थी श्रमिक बहनों को गर्भावस्था में आर्थिक चिंता नहीं करनी पड़ती। मां और बच्चे दोनों को बेहतर पोषण मिल रहा है। पात्र गर्भवती श्रमिक बहनों को 16 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। अगर कोई श्रमिक अस्थायी रूप से दिव्यांग हो जाए तो रोजी-रोटी का संकट न आए, इसलिए अस्थायी दिव्यांगता पर 1 लाख और स्थायी दिव्यांगता पर 2 लाख रुपये की सहायता संबल योजना के जरिए दी जा रही है।

मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल का बयान

पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कार्यक्रम में वर्चुअली हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि संबल योजना के हितग्राहियों का बैकलॉग खत्म करने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आज 11वीं किश्त के रूप में 1 जनवरी 2026 तक का भुगतान कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में संवेदनशील सरकार हर गरीब और श्रमिक के साथ हमेशा खड़ी है।

किश्त का ब्योरा

11वीं किश्त के लाभार्थियों में सामान्य मृत्यु अनुग्रह सहायता के 8027 हितग्राही, दुर्घटना मृत्यु के 1034, आंशिक स्थायी दिव्यांगता के 66 और स्थायी दिव्यांगता के 22 हितग्राही शामिल हैं। राज्य सरकार पात्र श्रमिकों को अंत्येष्टि सहायता के लिए 5 हजार रुपये, सामान्य मृत्यु पर 2 लाख रुपये, दुर्घटना में मृत्यु पर 4 लाख रुपये, आंशिक स्थायी दिव्यांगता पर 1 लाख और स्थायी दिव्यांगता पर 2 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता संबंधित हितग्राही या उनके निकटतम परिजन को देती है।

कार्यक्रम में श्रम सचिव रानी बाटड़ सहित अन्य विभागीय अधिकारी भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री निवास से सिंगल क्लिक से राशि ट्रांसफर होने की प्रक्रिया पारदर्शी और तेज रही। हितग्राही परिवारों में राखी से पहले यह आर्थिक सहारा खुशी लेकर आया है।

योजना का व्यापक असर

संबल योजना 2.0 सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि श्रमिक परिवारों को सुरक्षा का अहसास भी देती है। मृत्यु, दुर्घटना या दिव्यांगता जैसी स्थितियों में परिवार को तुरंत सहारा मिलना बहुत मायने रखता है। सरकार का फोकस है कि कोई भी श्रमिक परिवार संकट में अकेला न महसूस करे। गिग वर्कर्स को शामिल करने और शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाएं जोड़ने से योजना का दायरा और बढ़ा है।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि अंत्योदय ही हमारी सरकार का संकल्प है। श्रमिक मध्यप्रदेश की विकास गाथा के असली नायक हैं। उनकी मेहनत को सम्मान देना और संकट में साथ खड़ा होना सरकार की प्राथमिकता है। रक्षाबंधन से पहले मिली यह किश्त कई घरों में उत्साह लेकर आई है।

श्रम विभाग लगातार पात्र हितग्राहियों की सूची अपडेट कर रहा है ताकि कोई हकदार छूट न जाए। बैकलॉग खत्म होने से विश्वास बढ़ा है। श्रमिक संगठनों और हितग्राहियों ने भी इस कदम का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री के सीधे संबोधन से कई परिवारों को लगा कि सरकार उनकी बात सुन रही है।

मध्यप्रदेश में श्रमिक कल्याण की दिशा में यह एक और ठोस कदम है। संबल योजना के जरिए अब तक करोड़ों रुपये की सहायता पहुंच चुकी है। आने वाले समय में और सुधार और विस्तार की संभावनाएं बनी हुई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संदेश साफ था—श्रमिक अकेले नहीं हैं, सरकार हर कदम पर उनके साथ है।

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