नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में औपचारिक रूप से अपना कार्यभार संभाल लिया है। पदभार ग्रहण करते ही वे तुरंत एक्शन मोड में नज़र आए और उन्होंने शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।
उल्लेखनीय है कि पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा राष्ट्रपति द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें यह प्रभार ऐसे समय में मिला है, जब देश भर में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन को लेकर गहन चर्चा चल रही है।
वरिष्ठ और अनुभवी रणनीतिकार हैं प्रह्लाद जोशी
प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में शुमार हैं। वे कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांचवीं बार सांसद चुने गए हैं:
- वर्तमान मंत्रालय: वे वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का दायित्व भी निभा रहे हैं।
- पूर्व प्रशासनिक अनुभव: इससे पहले वे संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कुशलतापूर्वक संचालन कर चुके हैं।
नए शिक्षा मंत्री के समक्ष मुख्य चुनौतियां
शिक्षा मंत्रालय देश के करोड़ों विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विभाग है। ऐसे में प्रह्लाद जोशी के सामने कई महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं और चुनौतियां होंगी:
- परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता: प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करना और सार्वजनिक प्रणाली में आम जनता व छात्रों का विश्वास पुनः मजबूत करना।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP): राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चल रहे ढांचागत सुधारों को गति देना।
- गुणवत्ता और अनुसंधान: विद्यालयी शिक्षा के स्तर में सुधार, उच्च शिक्षण संस्थानों में रिसर्च (अनुसंधान) को बढ़ावा देना और कौशल-आधारित डिजिटल शिक्षा का विस्तार करना।
सुधारों और तकनीक आधारित मूल्यांकन पर रहेगा जोर
पदभार संभालने के साथ ही प्रह्लाद जोशी ने मंत्रालय के कामकाज की समीक्षा शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में मंत्रालय तकनीक-आधारित मूल्यांकन प्रणाली, विश्वविद्यालयों में शोध कार्यों को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान पर त्वरित निर्णय लेगा। अब देश भर के छात्रों और शिक्षाविदों की नज़र इस बात पर टिकी है कि नए शिक्षा मंत्री इन प्राथमिकताओं को किस प्रकार आगे बढ़ाते हैं।
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