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पंजाब में पेपर लीक और भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं पर सियासत तेज; CJP की चुप्पी पर भी उठने लगे सवाल

पंजाब में कथित पेपर लीक और भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर सियासत तेज। विपक्षी हमलों के बीच जानिए क्या है सीएम भगवंत मान और CJP का पक्ष।

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चंडीगढ़। पंजाब में कथित तौर पर पेपर लीक और सरकारी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। राज्य की भगवंत मान सरकार को घेरने के लिए विपक्षी दल लगातार हमलावर नजर आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने आरोप लगाया है कि राज्य में लगातार हो रही गड़बड़ियों से परीक्षा प्रणाली की साख को भारी नुकसान पहुँचा है। इसी बीच, युवाओं के मुद्दों पर खुलकर बोलने वाले संगठन CJP (Cockroach Janta Party) की भूमिका और उसकी चुप्पी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

विपक्षी पार्टियों का दावा है कि पिछले कुछ सालों में पंजाब की कई भर्ती परीक्षाओं में अनिममितताएं देखने को मिली हैं। जहां एक तरफ भाजपा नेताओं ने राज्य में बड़े पेपर लीक और घोटालों के आरोप लगाए हैं, वहीं कांग्रेस ने फार्मेसी अधिकारी भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ी का मुद्दा उठाते हुए संबंधित मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान का विपक्ष पर पलटवार

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी सरकार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि उनकी सरकार के साढ़े चार साल के शासनकाल में एक भी परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ है। सरकार का दावा है कि जहां भी नकल या तकनीकी धोखाधड़ी का प्रयास किया गया, वहां तुरंत सख्त कदम उठाते हुए दोषियों पर कार्रवाई की गई।

CJP संगठन की भूमिका पर उठते सवाल

इस पूरे राजनीतिक विवाद के बीच CJP की भूमिका चर्चा का केंद्र बनी हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा घोटालों और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर यह संगठन काफी मुखर और आक्रामक रुख अपनाता रहा है। ऐसे में आलोचकों का कहना है कि पंजाब के मामले में संगठन उस तरह से सक्रिय नजर नहीं आया, जैसा वह अन्य राज्यों या राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देता है।

CJP की आगामी रणनीति

हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि संगठन पंजाब के मुद्दे पर अपनी रणनीति तैयार कर रहा है। उन्होंने प्रशासन से छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने और वास्तविक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

इसलिए, यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि CJP पूरी तरह चुप है। यद्यपि संगठन ने अभी तक किसी बड़े आंदोलन या विरोध प्रदर्शन का ऐलान नहीं किया है, लेकिन उसके प्रतिनिधियों के अनुसार पंजाब के इस परीक्षा विवाद पर कानूनी व सामाजिक स्तर पर आगे की योजना बनाई जा रही है। फिलहाल पंजाब में यह मुद्दा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के दौर से गुजर रहा है।

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