नई दिल्ली। लोकसभा ने बुधवार को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और धांधली रोकने से जुड़े ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक पर सदन में लंबी और तीखी चर्चा हुई, जिसके समापन के बाद लोकसभा की कार्यवाही को गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष, विशेषकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रवैये पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील और अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक एवं सार्थक सुझाव देने के बजाय विपक्षी दल केवल इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने में जुटा हुआ है।
नेता प्रतिपक्ष के बयानों और भाषा पर उठाए सवाल
सदन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के आचरण पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता को दर्शाने वाले इस बिल पर विपक्ष का रवैया बेहद निराशाजनक रहा है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का मुख्य वक्तव्य:
- अमर्यादित भाषा का प्रयोग: “सदन में नेता प्रतिपक्ष द्वारा जिस प्रकार की भाषा का उपयोग किया गया, वह पूरी तरह अनुचित और असंसदीय थी। संसदीय मर्यादाओं से परिचित व्यक्ति को सदन के भीतर ऐसी शैली का प्रयोग नहीं करना चाहिए।”
- युवाओं का अपमान: “देश के युवाओं को, जो भारत का उज्ज्वल भविष्य हैं, ‘मूर्ख’ कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे पता चलता है कि उन्हें संसदीय कार्यवाही के बुनियादी नियमों का भी ज्ञान नहीं है।”
21 जुलाई की घटना और आंसू गैस के इस्तेमाल पर स्पष्टीकरण
केंद्रीय मंत्री ने 21 जुलाई की एक घटना का उल्लेख करते हुए नेता प्रतिपक्ष पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि वह किसी विशेष मंशा के तहत प्रधानमंत्री आवास (7 लोक कल्याण मार्ग) के बाहर जाकर बैठ गए थे। जब उन्हें समझाते हुए बताया गया कि यह आचरण उनके पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है, तो उन्होंने बस यही कहा कि उन्हें वहां से हटा दिया जाए।
सदन में एक अन्य मुद्दे का जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर स्थिति स्पष्ट की:
- कोई गोलीबारी नहीं हुई: जिस घटना की चर्चा की जा रही है, उसमें पुलिस या सुरक्षा बलों द्वारा कोई गोली नहीं चलाई गई थी, केवल आंसू गैस के गोलों का प्रयोग किया गया था।
- कानूनी प्रक्रिया: जब गोली चली ही नहीं, तो उसका आदेश देने का प्रश्न ही नहीं उठता। वैसे भी ऐसा आदेश देने का अधिकार किसी मंत्री के पास नहीं, बल्कि संबंधित मजिस्ट्रेट के पास होता है।
व्यापक बहस और सरकार के जवाब के बाद संसद के निचले सदन ने इस संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया, जिसके बाद बैठक अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।
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