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योगी सरकार में बदली बेसिक शिक्षा की तस्वीर, स्कूल चलो अभियान से नामांकन बढ़ा, स्मार्ट क्लास और DBT से गुणवत्ता सुधरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले नौ वर्षों में ठोस काम किया है। सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने से लेकर शिक्षण की गुणवत्ता सुधारने तक कई कदम उठाए गए हैं। स्कूल चलो अभियान के जरिए लाखों बच्चे स्कूल वापस लौटे हैं।

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के नेतृत्व में बेसिक शिक्षा क्षेत्र में पिछले नौ वर्षों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। स्कूल चलो अभियान, ऑपरेशन कायाकल्प और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी योजनाओं से सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ा है और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। आउट ऑफ स्कूल बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने, स्कूलों की अवस्थापना मजबूत करने और डिजिटल संसाधनों के इस्तेमाल से अभिभावकों का सरकारी स्कूलों पर भरोसा बढ़ा है। यह प्रयास बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने और शिक्षा को सार्वभौमिक बनाने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

योगी सरकार में बेसिक शिक्षा का परिवर्तन: नामांकन और गुणवत्ता में सुधार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले नौ वर्षों में ठोस काम किया है। सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने से लेकर शिक्षण की गुणवत्ता सुधारने तक कई कदम उठाए गए हैं। स्कूल चलो अभियान के जरिए लाखों बच्चे स्कूल वापस लौटे हैं। ऑपरेशन कायाकल्प से स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं बेहतर हुई हैं। स्मार्ट क्लासरूम, आईसीटी लैब और शिक्षकों को टैबलेट देकर पढ़ाई को आधुनिक बनाया गया है। इन प्रयासों से सरकारी स्कूलों पर लोगों का विश्वास बढ़ा है और शिक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है।

स्कूल चलो अभियान: लाखों बच्चों की स्कूल वापसी

स्कूल चलो अभियान उत्तर प्रदेश सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका मकसद हर बच्चे को स्कूल पहुंचाना है। वर्ष 2024-25 में इस अभियान के तहत 13.22 लाख बच्चों का नामांकन हुआ। वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 15.84 लाख तक पहुंच गया। इस साल अप्रैल महीने से अभियान शुरू हुआ और मात्र 20 दिनों में, यानी 20 अप्रैल तक, 8 लाख 79 हजार से ज्यादा नए बच्चों का नामांकन दर्ज किया गया।

सरकार ने आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान के लिए सर्वे किया। वर्ष 2024-25 में 7.73 लाख ऐसे बच्चों की पहचान हुई। इनमें से 2.69 लाख बच्चों को सीधे कक्षा 1 में दाखिला दिया गया, जबकि 5.04 लाख बच्चों को विशेष प्रशिक्षण देकर मुख्यधारा में शामिल किया गया। यह काम केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों को शिक्षा के अधिकार से जोड़ने का व्यावहारिक प्रयास रहा है। लगातार बढ़ते नामांकन से साफ है कि अभिभावक अब सरकारी स्कूलों को बेहतर विकल्प मानने लगे हैं।

निःशुल्क सुविधाएं और छात्र हित योजनाएं

सरकार ने बच्चों की पढ़ाई पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। हर साल 1.30 करोड़ से ज्यादा विद्यार्थियों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के जरिए यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर, बैग और स्टेशनरी के लिए 1200 रुपये प्रति छात्र दिए जाते हैं। कक्षा 1 से 8 तक सभी बच्चों को निःशुल्क किताबें और वर्कबुक उपलब्ध कराई जाती हैं।

इन सुविधाओं से अभिभावकों की जेब पर बोझ कम हुआ है और बच्चों की स्कूल में नियमित उपस्थिति बढ़ी है। ये योजनाएं उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा सुधार और डीबीटी योजना के तहत चलाई जा रही हैं, जो शिक्षा को सभी तक पहुंचाने में मदद कर रही हैं।

अवस्थापना विकास: ऑपरेशन कायाकल्प का असर

ऑपरेशन कायाकल्प उत्तर प्रदेश सरकार की एक बड़ी योजना है, जिसके तहत 1.32 लाख से ज्यादा परिषदीय विद्यालयों को नई सूरत दी गई है। वर्ष 2017-18 में केवल 36 प्रतिशत स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं थीं, जो अब 96.30 प्रतिशत हो गई हैं। हर स्कूल में डेस्क-बेंच, अलग शौचालय, पेयजल, बिजली और अच्छी कक्षाएं सुनिश्चित की गई हैं।

जिन ब्लॉकों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं थे, वहां नए आवासीय स्कूल बनाने का फैसला लिया गया है। सभी प्राथमिक स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने की दिशा में काम चल रहा है। इस योजना से स्कूलों की स्थिति सुधरी है और बच्चे सुरक्षित व आरामदायक माहौल में पढ़ सक रहे हैं।

मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय: नई शिक्षा दिशा

प्रदेश में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए 75 जिलों में 150 मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय बनाए जा रहे हैं। इन स्कूलों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक पढ़ाई होगी। प्रत्येक स्कूल पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं और कुल बजट 4500 करोड़ रुपये है। हर स्कूल में 1500 से ज्यादा छात्र पढ़ सकेंगे, जिससे कुल 2.25 लाख विद्यार्थी लाभान्वित होंगे।

इसके अलावा 75 मुख्यमंत्री अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालय भी विकसित किए जा रहे हैं, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर शिक्षा दी जाएगी। ये स्कूल उत्तर प्रदेश में शिक्षा के नए मानक स्थापित कर रहे हैं।

तकनीकी शिक्षा का विस्तार: स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब

आज के समय में शिक्षा को डिजिटल बनाने की जरूरत है। योगी सरकार ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं। हजारों स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम और आईसीटी लैब बनाई गई हैं। 2.61 लाख शिक्षकों को टैबलेट दिए गए हैं, जिससे पढ़ाई ज्यादा प्रभावी हुई है।

वर्ष 2024-25 में 4.53 लाख शिक्षकों और शिक्षामित्रों को फाउंडेशनल लिटरेसी और न्यूमेरसी पर चार दिन का प्रशिक्षण दिया गया। वर्ष 2025-26 में 4.33 लाख शिक्षकों को पांच दिन का प्रशिक्षण मिला। 1,32,828 परिषदीय स्कूलों में पुस्तकालय बनाए और सक्रिय किए गए हैं। पीएम श्री योजना के तहत 2022-23 से 2024-25 तक 25,954 स्कूलों में स्मार्ट क्लास लगाई गईं। वर्ष 2025-26 में अतिरिक्त 5,924 स्कूलों में स्मार्ट क्लास और 8,291 स्कूलों में आईसीटी लैब स्थापित की गई हैं। 880 ब्लॉक संसाधन केंद्रों में भी आईसीटी लैब बन चुकी हैं।

बालिका शिक्षा को मजबूती: कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय

बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना के तहत 746 स्कूल चल रहे हैं, जिन्हें कक्षा 6 से 12 तक ऊंचा किया गया है। इनमें 87,647 बालिकाएं नामांकित हैं। स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों से बालिकाओं का समग्र विकास हो रहा है। यह पहल शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक सशक्तिकरण में भी मदद कर रही है।

समावेशी शिक्षा: दिव्यांग बच्चों का ध्यान

दिव्यांग बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा पर काम हो रहा है। वर्ष 2024-25 में 29,241 और 2025-26 में 25,397 दिव्यांग बच्चों के प्रमाण पत्र बनवाए गए। सहायक उपकरण, एस्कॉर्ट भत्ता और छात्रवृत्ति डीबीटी से दी जा रही है। पीएम श्री योजना के तहत 1,722 स्कूलों को स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब से जोड़ा गया है। आरटीई कानून के तहत 2024-25 में 1.65 लाख और 2025-26 में 1.85 लाख बच्चों को निजी स्कूलों में निःशुल्क दाखिला दिलाया गया।

पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षकों का हित

पीएम पोषण योजना के तहत 1.42 लाख स्कूलों में 1.52 करोड़ बच्चों को भोजन दिया जा रहा है। साप्ताहिक दूध और फल वितरण से पोषण स्तर सुधरा है। 3.63 लाख रसोइयों को मानदेय मिलता है, जिनमें 93 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्हें आयुष्मान भारत योजना से भी जोड़ा गया है।

शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी की गई है। अब शिक्षामित्रों को 18,000 रुपये और अनुदेशकों को 17,000 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। इससे उनके मनोबल में सुधार हुआ है।

उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग ने संरचना, गुणवत्ता, तकनीक और समावेशन के स्तर पर बदलाव लाया है। योजनाओं का क्रियान्वयन मजबूत हुआ है और परिणाम स्कूलों में दिख रहे हैं। यह प्रयास नई पीढ़ी को बेहतर भविष्य देने की दिशा में महत्वपूर्ण है। शिक्षा से जुड़े ये सुधार प्रदेश के समग्र विकास में योगदान दे रहे हैं।

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