सूरत। गुजरात सरकार की ‘वतन प्रेम योजना’ के तहत बारडोली तालुका के नानी भटलाव गांव में एक आधुनिक लाइब्रेरी स्थापित की गई है, जो अब आसपास के कई गांवों के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का प्रमुख केंद्र बन गई है। युवा सरपंच अंकित चौधरी की पहल से शुरू हुई यह लाइब्रेरी प्रवासी भारतीयों के दान और सरकारी अनुदान से दो मंजिला भवन में बदल गई है। 24 घंटे खुली रहने वाली इस निशुल्क लाइब्रेरी में रोजाना 100 से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते हैं। यह आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा के नए अवसर पैदा कर रही है।
योजना की शुरुआत और युवा सरपंच की पहल
वर्ष 2021 में कोरोना काल के दौरान नानी भटलाव गांव के युवा सरपंच अंकित चौधरी ने गांव के युवाओं को पढ़ाई की सुविधा देने के लिए एक पुराने कम्युनिटी हॉल में लाइब्रेरी शुरू की। शुरू में संसाधन कम थे, लेकिन सरपंच की मेहनत से यह धीरे-धीरे आगे बढ़ी। आज यह लाइब्रेरी गुजरात सरकार की वतन प्रेम योजना के अंतर्गत प्रवासी भारतीय प्रतापभाई पंड्या के 7 लाख रुपये के दान और 10.50 लाख रुपये की सरकारी अनुदान राशि से आधुनिक दो मंजिला भवन में तब्दील हो चुकी है।
लाइब्रेरी की सुविधाएं और क्षमता
यह लाइब्रेरी अब 123 विद्यार्थियों की क्षमता वाली है। रोजाना 100 से ज्यादा छात्र-छात्राएं यहां आकर पढ़ते हैं। खास बात यह है कि लाइब्रेरी पूरे 24 घंटे खुली रहती है और पूरी तरह निशुल्क है। किसी भी प्रकार की फीस नहीं ली जाती। सभी विषयों की पुस्तकें उपलब्ध हैं, वाई-फाई की सुविधा है और ऑनलाइन अध्ययन की व्यवस्था भी मौजूद है।
आसपास के 15 से 20 गांवों के विद्यार्थी नियमित रूप से यहां आते हैं। यह क्षेत्र आदिवासी बहुल है, जहां छात्रों के पास पढ़ाई के सीमित विकल्प थे। इस लाइब्रेरी ने उनके लिए अच्छा माहौल तैयार कर दिया है।
छात्र-छात्राओं की प्रतिक्रिया
नजदीकी गांव बड़वानी से आने वाले विद्यार्थी निश्चल चौधरी कहते हैं कि वे पिछले एक साल से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। लाइब्रेरी 24 घंटे खुली रहती है, कोई शुल्क नहीं है और जरूरी किताबें आसानी से मिल जाती हैं। इससे उनकी पढ़ाई में काफी मदद मिल रही है।
श्वेताबेन चौधरी बताती हैं कि लड़कियों और लड़कों दोनों के लिए यहां सुविधा है। जब भी किताब चाहिए, मिल जाती है। यहां कॉम्पिटिटिव टेस्ट भी लिए जाते हैं, जिससे असली परीक्षा का माहौल मिलता है।
सरपंच अंकित चौधरी का विजन
सरपंच अंकित चौधरी बताते हैं कि लाइब्रेरी में 15-20 गांवों के विद्यार्थी आते हैं। हमने वाई-फाई और सभी तरह की किताबें उपलब्ध कराई हैं। जब विद्यार्थियों के एग्जाम सूरत, अहमदाबाद या गांधीनगर में होते हैं, तो लाइब्रेरी की तरफ से उन्हें वहां पहुंचाने की व्यवस्था भी की जाती है।
दूर से आने वाले छात्रों की सुविधा के लिए एक हॉस्टल भी बनाया जा रहा है। इससे वे रहकर अच्छे से तैयारी कर सकेंगे।
सफलता की कहानियां
पिछले कुछ वर्षों में इस लाइब्रेरी से पढ़ाई करने वाले कई छात्र विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो चुके हैं। वे अब सरकारी और प्राइवेट क्षेत्र में नौकरियां कर रहे हैं। यह सफलता पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई है।
वतन प्रेम योजना का महत्व
गुजरात सरकार की वतन प्रेम योजना प्रवासी भारतीयों को अपने गांव के विकास में योगदान देने का मौका देती है। नानी भटलाव की यह लाइब्रेरी योजना का बेहतरीन उदाहरण है। सोसायटी और सरकार के सहयोग से ऐसे बदलाव संभव हो रहे हैं। यह लाइब्रेरी पूरे गुजरात के अन्य गांवों के लिए रोल मॉडल बन गई है।
नानी भटलाव गांव की यह पहल दिखाती है कि सही दिशा और सामूहिक प्रयास से शिक्षा के क्षेत्र में कितना बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। 24 घंटे की निशुल्क सुविधा और आधुनिक संसाधनों से छात्रों का भविष्य उज्ज्वल हो रहा है।
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