Thyroid Disorders: थायरॉइड की गड़बड़ी दिमाग पर असर डाल सकती है, जिससे डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में थकान, मूड स्विंग्स या चिंता को लोग अक्सर तनाव की वजह मान लेते हैं, लेकिन कई बार इसका कारण शरीर में थायरॉइड हार्मोन का असंतुलन भी हो सकता है।
मेडिकल रिसर्च के अनुसार, थायरॉइड ग्रंथि के हार्मोन मेटाबॉलिज्म के साथ-साथ दिमाग के केमिकल बैलेंस को भी प्रभावित करते हैं। समय पर जांच और इलाज से इन समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है।
थायरॉइड ग्रंथि क्या है और यह दिमाग पर कैसे असर डालती है
थायरॉइड एक छोटी ग्रंथि होती है जो गर्दन के आगे वाले हिस्से में स्थित होती है। यह टी3 और टी4 जैसे हार्मोन बनाती है, जो शरीर की ऊर्जा, दिल की धड़कन, तापमान और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करते हैं। ये हार्मोन दिमाग में सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे केमिकल्स को भी प्रभावित करते हैं, जो मूड और भावनाओं को संतुलित रखते हैं। जब थायरॉइड ठीक से काम नहीं करता, तो दिमाग की सोचने की क्षमता और मूड पर असर पड़ सकता है।
हाइपोथायरॉइडिज्म और डिप्रेशन का संबंध
जब थायरॉइड हार्मोन कम बनता है, तो इसे हाइपोथायरॉइडिज्म कहते हैं। इसमें व्यक्ति को लगातार थकान, उदासी, काम करने का मन न लगना और याददाश्त कमजोर होना जैसी शिकायतें हो सकती हैं। कई अध्ययनों में पाया गया है कि हाइपोथायरॉइडिज्म डिप्रेशन के लक्षणों को बढ़ा सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, थायरॉइड हार्मोन की कमी से दिमाग के केमिकल बैलेंस बिगड़ता है, जिससे बिना वजह उदासी महसूस होती है।
हाइपरथायरॉइडिज्म और एंग्जायटी की समस्या
थायरॉइड हार्मोन ज्यादा बनने पर हाइपरथायरॉइडिज्म होता है। इसमें घबराहट, बेचैनी, चिड़चिड़ापन और एंग्जायटी बढ़ सकती है। मूड स्विंग्स भी आम हैं। ये लक्षण कभी-कभी मानसिक तनाव से अलग नहीं दिखते, इसलिए जांच जरूरी है।
थायरॉइड गड़बड़ी के मुख्य कारण
थायरॉइड की समस्या के पीछे ऑटोइम्यून बीमारियां जैसे हाशिमोटो थायरॉइडाइटिस और ग्रेव्स डिजीज प्रमुख हैं। इसके अलावा आयोडीन की कमी या ज्यादा मात्रा, लगातार तनाव, हार्मोनल बदलाव, प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के बाद होने वाले बदलाव भी कारण बन सकते हैं। परिवार में पहले से थायरॉइड की समस्या होने पर खतरा बढ़ जाता है। भारत में आयोडीन की कमी वाले क्षेत्रों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।
लक्षणों को नजरअंदाज न करें और क्या करें
थकान, वजन में बदलाव, ठंड या गर्मी लगना, बाल झड़ना, ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत या मूड में बदलाव जैसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर से TSH, T3 और T4 टेस्ट करवाएं। समय पर दवा और जीवनशैली में बदलाव से स्थिति सुधर सकती है। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें। स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन मददगार साबित हो सकता है।
डिस्क्लेमर: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें।
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