नई दिल्ली। देश के किसानों को आधुनिक और डिजिटल तकनीकों से जोड़कर सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार को एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। सरकार ने सोमवार को आधिकारिक आंकड़े साझा करते हुए बताया कि देश के एकीकृत डिजिटल कृषि-सलाहकार मंच ‘किसान सारथी’ (Kisan Sarathi Platform) के साथ अब तक लगभग 2.95 करोड़ किसान सफलतापूर्वक पंजीकृत हो चुके हैं। गर्व की बात यह है कि इन लाभार्थियों में 56.16 लाख महिला किसान भी शामिल हैं, जो डिजिटल माध्यम से खेती-किसानी के गुर सीख रही हैं।
वैज्ञानिकों और संस्थानों का एक मजबूत राष्ट्रीय नेटवर्क
इस डिजिटल मुहिम को सफल बनाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के 4,767 वैज्ञानिक और 113 आईसीएआर संस्थान इस मंच पर चौबीसों घंटे सक्रिय हैं। जुलाई 2021 में शुरू किए गए इस बेहतरीन प्लेटफॉर्म के जरिए अब तक किसानों द्वारा पूछे गए 19.21 लाख से अधिक प्रश्नों और समस्याओं का समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, किसानों की मदद के लिए 351 विभिन्न कृषि उत्पादों से जुड़ी लगभग 21,900 विशेष सलाह (Advisories) भी इस मंच से जारी की जा चुकी हैं।
किसानों ने कैसे कराया अपना पंजीकरण?
इस डिजिटल नेटवर्क से जुड़ने के लिए किसानों ने अलग-अलग माध्यमों का उपयोग किया है:
- कृषि विज्ञान केंद्र (KVK): सबसे अधिक करीब 2.89 करोड़ किसानों ने अपने नजदीकी केवीके जाकर रजिस्ट्रेशन कराया।
- किसान कॉल सेंटर: 5.35 लाख किसानों ने कॉल सेंटर की मदद ली।
- कॉमन सर्विस सेंटर (CSC): 39,193 किसान सीएससी सेंटरों के माध्यम से जुड़े।
- मोबाइल ऐप: 21,517 किसानों ने सीधे मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करके पंजीकरण किया।
- वेब पोर्टल: 2,416 किसानों ने आधिकारिक वेबसाइट के जरिए अपना रजिस्ट्रेशन पूरा किया।
वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म का दायरा देश के 37 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, 768 जिलों और लगभग 6.63 लाख गांवों तक फैल चुका है।
13 स्थानीय भाषाओं में लाइव संवाद और 610 योजनाओं की जानकारी
यह प्लेटफॉर्म इंटरैक्टिव इन्फॉर्मेशन डिसेमिनेशन सिस्टम (IIDS) तकनीक पर काम करता है। इसके माध्यम से किसान और कृषि वैज्ञानिक आपस में सीधे बातचीत (दो-तरफा संवाद) कर सकते हैं। यह मंच किसानों को 13 अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं में विशेषज्ञों से सीधे लाइव बातचीत करने की अनूठी सुविधा देता है। किसान अपनी स्थानीय भाषा में कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों से सवाल पूछकर अपनी ही भाषा में सटीक समाधान पा सकते हैं।
इसके अलावा, यह मंच ‘भाषिनी’, ‘मायस्कीम’, ‘भारत मौसम विज्ञान विभाग’ और ‘किसान कॉल सेंटर’ जैसी प्रमुख राष्ट्रीय सेवाओं से मजबूती से एकीकृत है। इसके जरिए किसानों को कुल 610 सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी मिलती है, जिनमें से 102 योजनाएं सीधे केंद्र सरकार द्वारा संचालित हैं।
अनाज से लेकर मत्स्य पालन तक की हर सलाह उपलब्ध
इस प्लेटफॉर्म पर किसानों को न केवल पारंपरिक अनाज, बल्कि दलहन, तिलहन, बागवानी, चारे की फसलों और बागान फसलों से संबंधित हर छोटी-बड़ी सलाह मिलती है। फसलों के साथ-साथ पशुपालन, पोल्ट्री फॉर्मिंग और मत्स्य पालन (मछली पालन) जैसे कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्रों की विश्वसनीय जानकारियां भी यहाँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
यह पूरा प्लेटफॉर्म इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की एक अनूठी संयुक्त पहल है। इसे भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान और डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन ने मिलकर विकसित किया है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से कृषि अनुसंधान संस्थानों की पहुंच सीधे खेतों तक बढ़ी है, जिससे वैज्ञानिक ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग जमीनी स्तर पर संभव हो रहा है।
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