महीसागर। गुजरात के महीसागर जिले के ग्रामीण इलाकों से महिला सशक्तिकरण और शिक्षा की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। यहाँ की ग्रामीण महिलाएं अब न केवल आत्मविश्वास से भरी हैं, बल्कि वे लिखना और पढ़ना भी सीख चुकी हैं। यह सकारात्मक बदलाव भारत सरकार के ‘उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ (ULLAS Scheme) के तहत जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए साक्षरता अभियान की बदौलत आया है।
महीसागर जिले में इस अभियान के पहले चरण की सफलता ने हजारों लोगों को निरक्षरता के अभिशाप से मुक्त कर दिया है। अब ये महिलाएं बैंक, डाकघर, स्थानीय डेयरी और अपने रोजगार से जुड़े रोजमर्रा के काम बिना किसी की मदद के खुद करने लगी हैं।
अंगूठे की जगह हस्ताक्षर और डेयरी की पर्ची पढ़ना सीखा
इस अभियान के तहत साक्षर बनीं मगूबेन ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि पहले उन्हें सिर्फ अंगूठा लगाना आता था, लेकिन आज वे गर्व से अपने हस्ताक्षर (साइन) कर लेती हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षकों ने उन्हें बहुत अच्छे से पढ़ाया, जिसके कारण उन्होंने तीन बार परीक्षा भी पास की है। इस उम्र में लिखना सीखने से वे बेहद खुश हैं।
वहीं, एक अन्य लाभार्थी भारतीबेन ने बताया कि पहले उन्हें घड़ी देखने और 100 तक गिनती गिनने में बहुत दिक्कत होती थी। लेकिन वालंटियर बच्चों ने उन्हें ये दोनों चीजें सिखा दी हैं। अब वे न केवल घड़ी देखना जानती हैं, बल्कि दूध डेयरी में दूध जमा कराते समय मिलने वाली पर्ची को भी खुद पढ़ लेती हैं।
रात के समय लगती थीं क्लास
महीसागर जिले के कुल 717 गांवों में से, वर्ष 2025 के दौरान उन गांवों का सर्वे किया गया था जहां महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से कम थी। इस सर्वे में 4,697 निरक्षर लोगों की पहचान की गई थी। इन लोगों को शिक्षित करने के लिए 126 सुपरवाइजर शिक्षकों की देखरेख में 532 छात्र-छात्राओं (विद्यार्थियों) ने जिम्मेदारी संभाली और 6 महीने तक उन्हें पढ़ाया।
जिले के पाखी, पट्टन, लिबोदरा और राणपुर जैसे कई गांवों में महिलाओं की सुविधा के अनुसार रात को 7:30 बजे से 8:30 बजे के बीच विशेष कक्षाएं लगाई गईं। मेहनत का नतीजा यह रहा कि कुल 4,561 लोगों ने मार्च के महीने में परीक्षा दी, जिसमें से 4,135 लोग सफलतापूर्वक पास हुए। इन सभी सफल लोगों को भारत सरकार द्वारा साक्षरता प्रमाणपत्र (Certificate) दिया जाएगा।
15 जुलाई से शुरू होगा दूसरा चरण: जिला कलेक्टर
महीसागर की जिला कलेक्टर अर्पित सागर ने बताया कि छात्र-छात्राओं ने रात के समय, जब ग्रामीण महिलाएं अपने घरेलू कामों से मुक्त हो जाती हैं, उन्हें बहुत लगन से पढ़ाया। पढ़ाई के साथ-साथ महिलाओं को व्यावहारिक ज्ञान जैसे बैंक में कामकाज करने का तरीका भी सिखाया गया। सबसे अच्छी बात यह रही कि महिलाओं ने खुद इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कलेक्टर ने आगे बताया कि अब इस साक्षरता अभियान का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है। इसके तहत उन गांवों का सर्वे किया जाएगा जहाँ महिलाओं की साक्षरता दर 60 फीसदी से अधिक है। इसके बाद 15 जुलाई से 15 अक्टूबर तक विशेष कक्षाएं संचालित की जाएंगी, और मार्च में होने वाली परीक्षा के लिए उन्हें पूरी तरह तैयार किया जाएगा। इस दूसरे चरण में बाकी बचे 347 गांवों को कवर करके पूरे महीसागर जिले को 100 प्रतिशत साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
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