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फोलिक एसिड क्यों है प्रेग्नेंसी का सबसे जरूरी विटामिन? मां-बच्चे दोनों के लिए जानें महत्व

Folic Acid in Pregnancy: गर्भावस्था में फोलिक एसिड भ्रूण के विकास के लिए खासतौर पर जरूरी है। यह भ्रूण के न्यूरल ट्यूब के सही विकास में मदद करता है। अगर गर्भधारण के शुरुआती दिनों में फोलिक एसिड की कमी रह जाती है तो बच्चे में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट की आशंका बढ़ सकती है।

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Folic Acid in Pregnancy: गर्भावस्था के दौरान फोलिक एसिड को “प्रेग्नेंसी का विटामिन” कहा जाता है क्योंकि यह मां और आने वाले बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। गर्भधारण से पहले और शुरुआती महीनों में इसका सेवन डॉक्टरों द्वारा अनिवार्य रूप से सलाह दिया जाता है। यह छोटी सी गोली नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करती है और बच्चे के मस्तिष्क व रीढ़ की हड्डी के सही विकास में अहम भूमिका निभाती है।

फोलिक एसिड विटामिन बी समूह का सिंथेटिक रूप है, जबकि इसका प्राकृतिक रूप फोलेट कहलाता है। यह हरी सब्जियों, दालों और सूखे मेवों में आसानी से उपलब्ध होता है। शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के साथ-साथ यह समग्र संतुलन बनाए रखने में भी सहायक है। गर्भवती महिलाओं में फोलिक एसिड की कमी से एनीमिया, कमजोरी और सिरदर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसलिए इसे समय पर लेना मां के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है।

भ्रूण के विकास में फोलिक एसिड (Folic Acid) की भूमिका

गर्भावस्था में फोलिक एसिड भ्रूण के विकास के लिए खासतौर पर जरूरी है। यह भ्रूण के न्यूरल ट्यूब के सही विकास में मदद करता है। अगर गर्भधारण के शुरुआती दिनों में फोलिक एसिड की कमी रह जाती है तो बच्चे में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट की आशंका बढ़ सकती है। इससे रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क का विकास ठीक से नहीं हो पाता, जिससे बच्चा पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता।

इसी वजह से डॉक्टर गर्भधारण से पहले कम से कम तीन महीने और गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में फोलिक एसिड लेने की सलाह देते हैं। समय पर इसका सेवन बच्चे को जन्मजात समस्याओं से बचाने में मदद करता है।

आयुर्वेद में गर्भिणी परिचर्या और फोलिक एसिड

आयुर्वेद में गर्भावस्था के समय को “गर्भिणी परिचर्या” कहा जाता है। इस दौरान ऐसे आहार लेने की सलाह दी जाती है जो शरीर में फोलिक एसिड की जरूरत को पूरा करें। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक और मेथी, आंवला, संतरा, अनार, मूंग दाल, मसूर दाल, चना, बादाम और अखरोट इसमें शामिल हैं।

आयुर्वेद के अनुसार इन आहारों से रक्त की वृद्धि होती है और गर्भ में पल रहे शिशु का विकास बेहतर तरीके से होता है। शतावरी, अश्वगंधा और गिलोय का सेवन भी चिकित्सक की सलाह पर किया जा सकता है।

फोलिक एसिड गर्भावस्था के दौरान मां और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसे नियमित रूप से लेना चाहिए। सही पोषण से मां स्वस्थ रहती है और बच्चा भी मजबूत और स्वस्थ पैदा होता है।

डिस्क्लेमर: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

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