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मां नर्मदा को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए आटे के दीपक बना रही महिलाएं – स्व-सहायता समूह की सराहनीय पहल

खंडवा जिले के ओंकारेश्वर के पास मोरटक्का गांव की महिलाओं ने पर्यावरण बचाने और अपनी आय बढ़ाने के लिए एक अनोखा काम शुरू किया है। उन्होंने “मां नर्मदा आजीविका स्वयं सहायता समूह” बनाकर आटे के दीपक बनाने का व्यवसाय शुरू किया है।

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भोपाल। खंडवा जिले के ओंकारेश्वर के पास मोरटक्का गांव की महिलाओं ने पर्यावरण बचाने और अपनी आय बढ़ाने के लिए एक अनोखा काम शुरू किया है। उन्होंने “मां नर्मदा आजीविका स्वयं सहायता समूह” बनाकर आटे के दीपक बनाने का व्यवसाय शुरू किया है। प्लास्टिक के दोने की जगह ये दीपक इस्तेमाल करने से नर्मदा नदी में प्रदूषण कम हो रहा है और मछलियों को भी भोजन मिल रहा है।

पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहल

मोरटक्का गांव की श्रीमती विजया जोशी ने इस समूह की शुरुआत की। उनका कहना है कि श्रद्धालु नर्मदा में दीपदान करते समय प्लास्टिक के दोने इस्तेमाल करते हैं, जिससे नदी गंदी होती है और जलीय जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए समूह की महिलाओं ने आटे के दीपक बनाना शुरू किया। ये दीपक पूरी तरह प्राकृतिक हैं और नदी में गिरने पर मछलियों का भोजन बन जाते हैं।

सरकारी मदद से शुरू हुआ व्यवसाय

समूह की महिलाओं ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत बनाए गए स्व-सहायता समूह के जरिए डेढ़ लाख रुपये का ऋण लिया। इसी पैसे से उन्होंने दीपक बनाने की मशीन खरीदी। ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक आनंद शर्मा ने बताया कि मिशन की टीम महिलाओं को पैकेजिंग, मार्केटिंग और ब्रांडिंग में लगातार मदद कर रही है।

इसके अलावा समूह की महिलाएं अब खुद इन दीपकों को पैक करके बेच भी रही हैं। मोरटक्का के खेड़ीघाट स्थित फूलमाला और किराना दुकानों पर ये आटे के दीपक आसानी से मिल रहे हैं। इससे ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं को सस्ते और पर्यावरण अनुकूल विकल्प मिल रहा है।

महिलाओं को मिली नई पहचान और आय

श्रीमती विजया जोशी समूह की अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि इस काम से दो बड़े फायदे हो रहे हैं। पहला, प्लास्टिक के दोनों से होने वाला प्रदूषण काफी कम हुआ है। दूसरा, आटे के दीपक नर्मदा नदी में मछलियों के लिए भोजन का काम कर रहे हैं।

वे आगे कहती हैं कि शास्त्रों में दीपदान का खास महत्व है। आटे के दीपक में दीपदान करने से मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता भी लोगों में है। इस पहल से समूह की महिलाओं को न सिर्फ आय का जरिया मिला है बल्कि उन्हें समाज में नई पहचान भी मिली है।

प्रदेश सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए स्व-सहायता समूहों को लगातार प्रोत्साहन दे रही है। ओंकारेश्वर के इस समूह ने दिखाया है कि स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर छोटे-छोटे कदम कैसे बड़े बदलाव ला सकते हैं। आटे के दीपक न सिर्फ नर्मदा नदी को साफ रखने में मदद कर रहे हैं बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर भी बना रहे हैं।

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